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गम भगाओ दम लाओ जिंदगी में

जिंदगी में बहुत मुश्किलें है, जिंदगी झंड है झंड, काश मैं ऐसा कर पाता। आप इस तरह की लाइन बहुत बार लाइफ में बोल जाते हो। क्या आपको आईडिया है कि इन लाइन को बोलने से आपकी लाइफ में क्या असर होता है? क्या इंपैक्ट होता है?

यह मेरा दावा है कि एक बार आप को यह पता चल गया ना कि इसकी वजह से आपकी लाइफ कैसे प्रभावित होती है तो आप दोबारा लाइफ में कभी भी अपने मुंह से नेगेटिव शब्द नहीं निकालोगे।

दो लाइन को यूज करते हुए मैं आपको एक कांसेप्ट समझाऊंगा। मेरी जिंदगी में बहुत मुश्किले हैं अक्सर हम ऐसी लाइन बोल जाते हैं, इसी लाइन को बोलने का एक और तरीका हो सकता है, मेरी जिंदगी में बहुत सारे सीखने के मौके हैं। इन दोनों लाइंस को एग्जांपल लेते हुए मैं आपको बताऊंगा इस कांसेप्ट के पीछे का साइंस, एक्सपीरियंस और इंपैक्ट और फिर आप जान पाओगे कैसे कुछ शब्द को बदल के आप अपनी लाइफ में से गम निकाल सकते हो और दम डाल सकते हो।

मैं आप को बताऊंगा कि क्या एक्शन लेने है जिससे आप अपनी लाइफ चेंज कर पाओ, लाइफ को ट्रांसफार्म कर पाओ, गम खत्म कर पाओ और दम अंदर भर पाओ।

पहले बात करते हैं साइंस की

हम सब के ब्रेन में बदाम की शेप जैसा एक सेक्शन होता है जिसे Amygdala कहते हैं। ये हमारे इमोशंस, मेमोरी और डिसीजन लेने की कैपेसिटी को प्रोसेस करता है। एक भी नेगेटिव वर्ड या नेगेटिव थॉट यहाँ से स्ट्रेस बनाने वाले हार्मोन्स न्यूरोट्रांसमीटर को प्रोड्यूस करता है। जो हमारी सोचने समझने की केपेसिटी को अफेक्ट करता है। इसका असर सिर्फ इमोशंस पर नहीं, हमारी बॉडी पर भी होता है।

ऐसी लाइन बोलकर हमारी बॉडी लैंग्वेज नेगेटिव मोड पर आ जाती है। कंधे झुक जाते हैं, एनर्जी खत्म हो जाती है। नेगेटिव बोलते हुए कभी कुछ पॉजिटिव नहीं होता। कभी ऐसा तो नहीं हुआ के आप नेगेटिव बोल रहे हो और आपकी बॉडी लैंग्वेज पॉजिटिव हो।

बहुत सारी रिसर्च बार बार ये प्रूफ कर चुकी है की नेगेटिव वर्ड्स हमारे माइंड को और बॉडी को स्ट्रेस में ले आते हैं। लेकिन पॉजिटिव वर्ड्स हमारे माइंड को पावर देते हैं और बॉडी को कॉन्फिडेंस देते हैं।

अब बात करते हैं एक्सपीरियंस की

मोहम्मद अली ने कहा है अगर जूतों में पत्थर रखकर चलोगे तो क्या ही आगे बढ़ोगे और नेगेटिव वर्ड्स हमारे जूतों में वही पत्थर हैं। जो हमे आगे बढ़ने नहीं देते। जो हमारी स्पीड को स्लो कर देते हैं। क्योंकि ऐसी नेगेटिव लाइन बोल कर खुद को कमजोर बना देते हो। खुद को टेन्स करते हो, परेशान करते हो, खुद को बेचैन फील कराते हो। वही लाइफ आपको बुरी लगनी शुरू हो जाती है।

लेकिन ऐसी पॉजिटिव लाइन बोल कर आप खुद को मजबूत कर सकते हो। लाइफ में सीखने के अवसर नज़र आते हैं। लाइफ में आगे बढ़ने के अवसर नजर आते हैं। वही लाइफ आपको तोहफा लगनी शुरू हो जाती है। एक तरफ आप गम बढ़ा रहे हो पर एक तरफ दम बढ़ा रहे हो।

अब इंपैक्ट की बात करते हैं

आपको भी पता है कि जो लोग कंप्लेंट करते रहते है, रोते रहते हैं, नेगेटिव शब्द बोलते रहते हैं उनके आसपास कोई नहीं रहना चाहता। उनके करीब कोई नहीं आना चाहता। उनके साथ कोई दोस्ती नहीं रखना चाहता। उनको कोई मौके नहीं देना चाहता। उनको कोई प्रमोशन नहीं देना चाहता। उनसे कोई शादी नहीं करना चाहता।

लेकिन जो लोग पॉजिटिव रहते हैं, पॉजिटिव शब्द बोलते हैं, उनके आसपास रह कर हर कोई खुश रहता है। उनके करीब आना हर कोई पसंद करता है। उन्हीं लोगों को मौके मिलते हैं। याद रहे की आपके शब्द इंपैक्ट क्रिएट करते हैं दूसरों पे और वो पॉजिटिव होगा यह नेगेटिव होगा वह आप पर डिपेंड करता है।

अब आपका सवाल होगा कि करना क्या है, एक्शन क्या लेना होगा? अगर जिंदगी बदलनी है तो शुरुआत शब्द बदल कर ही होगी। ऐसी कोई भी लाइन आपको नहीं बोलनी जो आपका गम बढ़ा रही हो। आपको वह लाइन को बोलना है जोआपका दम बढ़ा रही हों। ये लाइन को सीखना होगा, समझना होगा जो हम अभी करेंगे।

एक लाइन जो हमने एग्जांपल मैं समझी कि जिंदगी में मुसीबत नहीं है, जिंदगी में सीखने के मौके हैं। आज के बाद मुसीबत नहीं बोलना, सीखने के मौके बोलना है। आप समझ गए कि फर्क क्या आएगा उससे।

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एक और वर्ड जो हमे चेंज करना है, “काश” काश मैं टाइम मैनेजमेंट सीख जाऊं, काश में ये स्किल सिख जाऊं, काश मैं ये हासिल कर लूं, काश में ये एग्जाम क्लियर कर लूं, जब तक हम काश कहेंगे मतलब के ये जरूरी नहीं है। “काश” कहीं ना कहीं ऑप्शन छोड़ दिया, स्कोप छोड़ दिया और अगर ऑप्शन छोड़ेंगे तो सक्सेस भी ऑप्शनल हो जाएगा।

लेकिन अगर काश कहना छोड़ दे और कुछ और लगाएं उसकी जगह, कि मुझे हर हालत में टाइम मैनेजमेंट सीखनी है, मुझे हर हालत में एग्जाम क्लियर करना है, मुझे हर हालत में ये स्किल सीखनी है, मुझे हर हालत में हासिल करना है, तो अब ऑप्शन नहीं छोड़ी आपने। आपने अपने को कंपलसरी कर दिया कि मुझे यह अचीव करके रहना है। मुझे टाइम मैनेजमेंट सीख कर रहनी है। काश कहेंगे तो नहीं होगा। काश कहना छोड़ देंगे तो आकाश छू लेंगे।

मुझे यह काम खत्म कर लेना चाहिए, चाहिए लगाकर भी आप खुद को एक ऑप्शन दे देते हो और गम के चांसेस आ जाते हैं। मुझे यह काम खत्म करना है मतलब कोई ऑप्शन नहीं है, यह है दम कि कुछ भी हो जाए किसी भी हालत में मुझे ये काम खत्म करना है। चाहिए हटा दो और उसको और स्ट्रांग बना दो।

मैं सिगरेट नहीं पी सकता, सकता कमजोरी है, मजबूरी है। लोग आपको फोर्स करेंगे मैं सिगरेट नहीं पी सकता, मैं शराब नहीं पी सकता, मैं लेट नहीं सो सकता, मैं फेल नहीं हो सकता, “सकता” पे आपने अपनी कमजोरी दिखा दी, लोगों को चान्स दे दिया आपको फोर्स करने का।

लेकिन अगर इसको चेंज कर दे कि मैं सिगरेट नहीं पीता, मैं शराब नहीं पीता, मैं लेट नहीं सोता, क्या हो गया अथॉरिटी आ गई, पावर आ गई, खुद को पावर दे दी कि नहीं कर सकता। लोग आपको कनवेंस करने की कोशिश भी नहीं करते क्योंकि आपने बोल दिया मैं यह नहीं करता।

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अब आप आज के बाद जिंदगी झंड नहीं जिंदगी शानदार है कहेंगे, मजे आ रहे हैं तो अगली बार मुंह से गम भरे शब्द निकालने से पहले इसके पीछे की साइंस, एक्सपीरियंस और इंपैक्ट को याद रखना और गम बढ़ाने की जगह दम बढ़ा लेना। अपनी लाइफ को नेगेटिव से पॉजिटिव कर पाओगे। अपने Actions, अपने परफॉर्मेंस और अपने रिजल्ट को इंप्रूव कर पाओगे। लाइफ को बदल पाओगे।

दिल में दम होगा तो गम दूर हो जाएगा, तेरा कल बदलने को मजबूर हो जाएगा।

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