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जल प्रदूषण से कैसे बचें?

💧 Water pollution in hindi 💧

जल का महत्व –

जिस प्रकार से वायु और मिट्टी हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, उसी प्रकार जल भी हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमारे शरीर में दो तिहाई पानी है, बल्कि यूँ कहें कि हम जल के बिना जीवित नहीं रहे सकतें हैं।

जल का उपयोग हम रोज़मर्रा के कार्यों में करते हैं, जैसे – नहाना, खाना बनाना, कपड़े धोना आदि कार्यों मे करते हैं। जल के बिना धरती पर कोई भी जीव-जंतु मनुष्य कोई भी जीवित नहीं रहे सकता है।

आज मनुष्य चाँद से लेकर मंगल तक जल की खोज में लगा है, ताकि वहाँ पर भी जीवन सम्भव हो सके। हमारे शरीर को कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा जैसे तत्वों की जरूरत होती है। जल में ये सभी तत्व होते हैं। जल हमारे शरीर का तापमान समान बनाने में मदद करता है।

जल हमारा पाचन कार्य करने में मदद करता है। हमारा जीवन जल पर ही निर्भर है, लेकिन जल मनुष्य के लिए इतना महत्वपूर्ण है फिर भी मनुष्य इसे दूषित कर रहा है।

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जल प्रदूषण के कारण –

जनसंख्या वृद्धि के कारण जल दिन प्रतिदिन प्रदूषित होता जा रहा है। जल में प्रतिदिन रासायनिक एवं अवांछित (Unwanted) पदार्थ मिलकर जल की गुडवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं। जल प्रदूषित एवं जल को बर्बाद किया जा रहा है।

जहां “जल” प्रकृति की देन है वहीं आज स्थिति यह हो गई है कि बड़े बड़े शहरों जैसे – दिल्ली, मुम्बई आदि में पानी को खरीद कर पीना पड़ रहा है। यहाँ तक कि गंगा नदी को सबसे पवित्र माना जाता है, लेकिन आज उसका जल भी दूषित हो चुका है। केवल गंगा ही नही गंगा जैसी दस नदियां भी जल प्रदूषण से प्रभावित हो गई हैं।

हमारी धरती पर पर्याप्त जल है, परंतु ताज़े जल का एक प्रतिशत है। जिसे दूषित और बर्बाद करने से जल की दर में कमी आ गई है।

जल के स्रोतों जैसे – झीलों, नदियोँ, तालाबों, समुन्द्रों और भूजल में अवांछित पदार्थों के मिलने से जल प्रदूषण होता है, जो पदार्थ जल को प्रदूषित करते हैं वह प्रदूषक कहलाते हैं।

जल प्रदूषण समस्त मानव जाति अपितु समस्त जीव-जंतुओं और पेड़ पौधों को भी प्रभावित कर रहा है। जल प्रदूषण कई कारणों से होता है, जैसे –

  • समुद्र में कूड़ा करकट आदि के डालने से।
  • औधोगिक कचरे को जलाशय में डालने से जल प्रदूषण को बढ़ावा मिल रहा है।
  • जल में दूषित तेलो का मिलना।
  • शिविर यानी शौचालय आदि के पाइप, जल में छोड़ने से।
  • भूमिगत भंडारों का लीक होना आदि से जल प्रदूषण बढ़ रहा है।

जल प्रदूषण के प्रकार

जल प्रदूषण दो प्रकार का होता है – एक प्रकृति द्वारा, दूसरा मानव द्वारा।

प्रकृति द्वारा –

प्रकृति द्वारा कुछ जगहों पर कुछ अकार्बनिक रासायनिक यौगिकों जैसे फ्लोराइड, असारनिक आदि ये सब रसायन प्रचूर मात्रा में जल में मिल जाते हैं। जिससे जल प्रदूषण होता है। ये पदार्थ हमारे शरीर में जाकर ठीक से उत्सर्जित नही होते, जिसका परिणाम काफी छति ग्रस्त होता है।

फ्लोराइड के जल में मिलने के कारण शरीर में फ्लोराइड की मात्रा अधिक हो जाती है, जिससे फ्लोरोसिस नामक रोग उतपन होता है। जिसमे मनुष्य के शरीर में हाथ पैर टेड़े होने लगते हैं और आंखों पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ता है।

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मानव द्वारा जल प्रदूषण के प्रकार –

मानव द्वारा भी जल प्रदूषण दो प्रकार का होता है

पहला रासायनिक, दूसरा जीवाणुओं द्वारा उत्पन्न रासायनिक प्रदूषण के अंतर्गत नाइट्राइट स्त्रोत में आता है। जैसे – उर्वक, अस्वच्छ परिस्थितियां, साफ सफाई के प्रति लापरवाही और रिसाव जिसका प्रभाव नवजात शिशुओं पर अत्यअधिक पड़ता है।

इसके अलावा रासायनिक प्रदूषण कुछ भारी धातुएं जैसे – शीशा, बैटरी बनाने अथवा रंग बनाने बाले उद्योगों में प्रयोग होता है। जिसे जल मे प्रवाहित कर दिया जाता है।

कैडमियम समुद्री एवं वायुयानों के उद्योगों में प्रयोग होता है। जैसे – उर्वरक, पेट्रोलियम आदि में कैडमियम का प्रयोग होता है।

पारा कई प्रकार के उधोगो एवं विभिन्न प्रकार के उत्पादों जैसे – बैटरी, लैम्प, थरमामीटर आदि उत्पादों में प्रयोग किया जाता है। इन सभी भारी धातुओं का जल में मिलने से रासायनिक प्रदूषण होता है। जिसके प्रभाव से कई जान लेबा बीमारियां उत्पन्न हो रही हैं।

जैसे जैसे हम खाद्य श्रृंखला में बढ़ते है, जितने भी रासायनिक पदार्थ एवं अवांछित पदार्थ जल में मिल जाते हैं, जिसे जल में रहने वाले जीवाणु यानी जीव-जंतु खा लेते हैं, इन जीवाणुओ का प्रयोग हम अपने भोजन में करते हैं, जो हमारे शरीर को नुकसान पहुँचा सकते हैं। उसी को जीवाणुओ द्वारा उत्पन्न जल प्रदूषण कहते हैं।

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जल प्रदूषण के प्रभाव –

अब आइए जानते है जल प्रदूषण के क्या प्रभाव हैं !

1.जल प्रदूषण हमारे शरीर के अंगों को प्रभावित करता है, जिससे हमारे शरीर मे अनेक रोग उत्पन्न हो जाते हैं। जैसे – कई प्रकार के कैंसर, स्किन कैंसर आदि।

2.इसके अलावा हमारे शरीर में पोलियो, टाइफाइड, गुर्दे के रोग, पीलिया आदि अन्य प्रकार के रोग उत्पन्न होते हैं।

3.जल प्रदूषण से बाढ़ का खतरा भी अत्यधिक बढ़ जाता है। जल प्रदूषण जानवरो को भी प्रभावित करता है।

जल प्रदूषण को कम करने के उपाय

1. जल प्रदूषण को कम करने के लिए हमे औद्योगिक कारखानों में से निकलने बाले रसायन, कूड़ा करकट, एवं अवांछित पदार्थों को सीधे जल में विसर्जित नही करना चाहिये। इस पर ओधोगिक कारखानों पर सख्ती करनी चाहिये।

2. खेतो में प्रयोग किये जाने वाले उर्वरकों एवं रसायनों को नदी आदि में जाने से रोकना चाहिये।

3. अपने व्यक्तित्व को देखते हुए हमें जल को बर्बाद नही करना चाहिये।

4. घरों का शिविर नदी, तालाब आदि में नही छोड़ना चाहिए।

5. हमे अपने जीवन में रीसाइक्लिंग का तरीका अपनाना चाहिए।

6. वैज्ञानिकों को कुछ ऐसे कदम उठाने चाहिए जो जल प्रदूषण रोकने के लिए बने हों।

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