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टॉप 10 अकबर बीरबल की कहानियाँ

💦 Akbar Birbal Stories In Hindi  💦


#01 💰 दुष्ट काज़ी  💰

एक दिन बादशाह अकबर के दरबार मे एक किसान आया, उसका नाम सैफ अली था। अकबर उससे कहतें हैं –

अकबर बोलो कैसे आना हुआ?

सैफ अली – जहाँ पना छह महीने पहले मेरी बीबी गुज़र गई, जिसके चलते मैं अपनी ज़िंदगी मे बिल्कुल अकेला हो गया हूँ। अभी छह महीने पहले बहुत खुशी से ज़िन्दगी काट रहा था, फिर अचानक मेरी बीबी गुज़र गई। मेरी कोई औलाद भी नही है जिसके सहारे मैं अपनी ज़िंदगी काट लूँ।

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अकबरहमे बहुत दुख हुआ ये सब सुनके!

सैफ अली – जहाँ पना मैं खेती करके थोड़े बहुत पैसे कमा लेता हूँ, पर मेरा अब किसी काम मे मन ही नही लग रहा है।फिर एक दिन मुझे काज़ी अब्दुल्ला मिले और उन्होंने मेरे हाल चाल पूछे। मैने उन्हें अपनी पूरी कहानी बताई, “मैंने कहा मेरी बीबी गुज़र गई जिस की वजह से मैं बहुत अकेला हो गया हूँ।”

तो उन्होंने मुझसे कहा तुम एक काम करो अजमेर चले जाओ, ख्वाजा के दरबार मे, वहाँ तुम्हे काफी सुकून मिलेगा। मैं उनकी इस बात से सहमत हो गया फिर उस रात मैं यही सोचता रहा कि मैं अपनी ज़िन्दगी भर की जमा पूंजी कहाँ छोड़ कर जाऊंगा।

फिर मैंने सोचा इस काम के लिए काज़ी अब्दुल्ला से बेहतर कौन हो सकता है। फिर मैं अगले दिन काज़ी अब्दुल्ला के घर अपनी जमा पूंजी लेकर पहुँचा, वह रखने के लिए राजी हो गए। उन्होंने मुझ से कहा तुम इत्मीनान से जाओ मैं इसकी हिफाज़त करूँगा और उन्होंने उस थैले पर मुझसे मोहर लगाने को कहा।

मैंने उस पर मोहर लगाई और थैला दे दिया। फिर मैं इत्मिनान से अजमेर को चला गया। जब मैं वहां से बापस लौटा तो मैंने सोचा मैं अपनी पूरी ज़िन्दगी बच्चो को इल्मी तालीम देने में निकाल दूंगा और जो मेरी जमा पूंजी है मैं उससे गुजारा कर लिया करूँगा।

फिर जब मैं काज़ी अब्दुल्ला के नगर पहुंचा, जब मैं उनके घर पहुंचा तो उन्होने मुझे मोहर देखने को कहा, मोहर ठीक लगी है? मैंने कहा मोहर तो ठीक है और मैं थैला घर लाया।

जब मैंने घर आकर थैला देखा तो उसमे सोने की अशर्फियों की जगह पत्थर भरे हुए थे। फिर मैं काज़ी अब्दुल्ला के पास गया और कहा मैंने तो आपको सोने की अशर्फियाँ दी थीं, फिर इसमें पत्थर कैसे बन गए? काज़ी ने कहा जिस तरह तुमने मुझे थैला दिया बैसे ही मैंने तुम्हे दे दिया था। तुम मुझ पर चोरी का इल्जाम लगा रहे हो।

हम दोनों में काफी देर बहस हुई और काज़ी अब्दुल्ला ने मुझे अपने घर से जाने को कह दिया जहाँ पना अब मैं क्या करूँ? मुझे इंसाफ चाहिये।

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अकबर हूँ 🤔! तुम क्या कहते हो बीरबल तुम्हारा क्या कहना है?

बीरबल – जहाँ पना मैं कुछ जानना चाहता हूँ, बीरबल सैफ अली से थैला लेते हैं और उसे जांचते हैं। बीरबल सैफ अली को थैला बापस लौटा देते है और कहतें है जहाँ पना मुझे कुछ वक्त चाहिये मुझे आप दो दिन का वक्त दें।

अकबर हाँ-हाँ बीरबल क्यों नही हम तुम्हें वक्त देते है और सैफ अली अगर तुम्हारी बात झूठी निकली तो तुम्हे एक साल के लिए करबास में डाल दिया जाएगा और जब तक ये फैसला नही हो रहा जब तक तुम हमारे महमान हो।

फिर क्या था बीरबल सच्चाई की खोज करने लगे और अपनी एक पोशाक को जान बूझ कर फाड़ कर अपने सेवक को बुलाया और उससे कहा जो शहर का सबसे अच्छा दर्जी हो उससे रफू करबा कर लाओ।

सेवक – मैं अभी जाता हूँ और अच्छे से दर्जी का पता लगाता हूँ।

सेवक सबसे अच्छे दर्जी की तलाश में निकल जाता है। थोड़ी देर में वो सेवक पोशाक सिलवा कर लाता है।

बीरबल – वाह क्या रफू किया है पोशाक भी सिल गयी और रफू का पता भी नही चल रहा है। वाह क्या कारीगरी है। जरा उस कारी गर का नाम तो बताओ?

सेवक – जनाब बहुत से लोग उसके बारे में जानते थे और उसे ढूंढना ज्यादा मुश्किल भी नही हुआ जनाब उसका नाम गोपाल है।

बीरबल – सेवक तुम उस दर्जी को बुला कर लाओ मुझे और भी फ़टी हुई पोशाकें सिलबानी हैं।

फिर अगले दिन अकबर के दरबार मे फैसला होता है।

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अकबर – क्या दोषी का पता चल गया बीरबल?

बीरबल – हाँ जहाँ पना मैंने दोषी का पता लगा लिया। सैफ अली और काज़ी अब्दुल्ला को दरबार मे बुलाया जाए, दोनों को दरबार मे बुलाया जाता है।

बीरबल – सैफ अली ये क्या तुम्हारा ही थैला है?

सैफ अली – जी हुजूर ये मेरा ही थैला है।

बीरबल – काज़ी अब्दुल्ला इस थैले को पहचानते हो?

काज़ी अब्दुल्ला – जी ये थैला देखा तो है, ये थैला सैफ अली का है ये जो मेरे पास रखने आया था। ये मोहर भी इसी ने अपने हाथों से लगाई थी जो अभी खुली है। ये थैला सैफ अली जब मेरे पास रखने आया था तो मुझे क्या पता इसमे सोने की अशर्फियाँ है या पत्थर हैं। ये मुझे कैसे पता होगा इसने तो खुद इस पर मोहर लगाई थी। सैफ अली झूठ बोल रहा है।

बीरबल काज़ी अब्दुल्ला की ये बात सुनकर चौंकता है।

बीरबल – हूँ🤔! दर्जी गोपाल को दरबार मे पेश किया जाए

दर्जी गोपाल का नाम सुनकर काज़ी अब्दुल्ला के चेहरे की हबाइयाँ उड़ जातीं हैं।

बीरबल – गोपाल तुम ये बताओ कि तुमने हाल ही में काज़ी अब्दुल्ला की किसी चीज पर रफू किया है?

र्जी गोपाल– जी हुजूर मैने अभी हाल ही में काज़ी अब्दुल्ला का एक पैसों का थैला सिला था जो फट गया था।

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बीरबल – जहाँ पना आप इसे क्या सज़ा देंगे इसने इतना बड़ा धोखा किया।

काज़ी अब्दुल्ला – काज़ी अब्दुल्ला गिड़गिड़ाने लगा, रहम की भीख मांगने लगा। जहाँ पना मैं बहुत लालची हो गया था मुझे माफ़ कर दीजिय। बस एक बार माफ कर दीजिये अब मैं कभी ऐसा नही करूंगा।

अकबर – नही तुम्हारी गलती माफ करने लायक नही है, इतने बड़े औधे पर होकर इतनी घटिया हरकत करते हुए तुम्हे शर्म नही आई। तुम्हे एक साल के लिए कारावास में डाल दिया जाए, सिपाहियों इसे ले जाओ।

सैफ अली तुम फिक्र मत करो तुम्हे तुम्हारा पैसा मिल जाएगा और साथ ही हम तुम्हारे इस नेक काम मे मदद करेंगे। हम तुम्हारे लिए एक मदरसा बनबा देंगे जिसमे तुम बच्चों को इल्मी तालीम देना।

सैफ अली – शुक्रिया जहाँ पना, शुक्रिया बीरबल मेरा साथ देने के लिए।

अकबर – शाबास बीरबल! अच्छा ये बताओ कि तुम्हे कैसे पता चला काज़ी अब्दुल्ला ही दोषी है?

बीरबल – जब मैंने सैफ अली के मुँह ये सुना मुझसे थैले पर मोहर लगाने को काज़ी अब्दुल्ला ने कहा तभी मैने सैफ अली से जांच करने के लिए थैला मांगा। मैं समझ गया पैसा मोहर तोड़ कर नही किसी और तरीके से निकाला गया है। फिर क्या था तलाश थी एक दर्जी की जिसे अच्छे से रफू करना आता हो।

अकबर – वाह! बीरबल वाह! तुमने एक बार फिर मिसाल कायम कर दी।

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#02 सोने का खेत

एक दिन की बात है जहाँ पना अकबर के दरबार मे सुबह-सुबह कोई सफाई कर रहा था। वो एक फूलदान की सफाई कर रहा था। फिर अचानक वह फूलदान उसके हाथ से फिसल जाता है और टूट जाता है। सेवक फूलदान टूटने से घबरा जाता है और कहता है या खुदा ये क्या हो गया ये तो जहाँ पना का सबसे पसंदीदा फूलदान था। अब जहाँ पना मुझे सजा देंगे और वह फूलदान के टूटे हुए टुकड़े समेट कर घबराता हुआ चला जाता है।

तभी वहां जहाँ पना अकबर आते हैं और अपना फूलदान न पाकर परेशान होने लगते हैं और अपने सिपाही को बुलाते हैं और कहते हैं –

अकबर – सिपाही यहाँ पर जो फूलदान रहा करता था वो कहाँ गया, कहीं वो फिर से तो कहीं नही खो गया।

सिपाही – जब मैंने सेवक को सफाई करने के लिए भेजा था तब तो यहीं था, उस सेवक को ही पता होगा के फूल दान कहाँ गया?

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अकबर – जाओ उस सेवक को बुला कर लाओ और सिपाही सेवक को बुलाने चला जाता है। थोड़ी देर बाद सिपाही सेवक को बुलाकर लाता है।

अकबर – सेवक यहाँ पर जो फूल दान रखा था वो कहाँ गया?

सेवक बहुत घबरा जाता है और कहता है –

सेवक – जहाँ पना वो मैं फूलदान को साफ करने के लिये ले गया था।

अकबर – लेकिन साफ करने के लिए फूलदान को यहाँ से ले जाने की क्या ज़रूरत थी?

सेवक रोने लगता है और कहता है –

सेवक – जहाँ पना वो फूलदान मुझसे गलती से टूट गया।

अकबर – लेकिन अभी तो तुमने कहा था कि तुम फूलदान साफ करने के लिए ले गए थे। मैं तुम्हे फूल दान टूटने के लिये तो माफ करता हूँ लेकिन मैं तुम्हे झूठ बोलने के लिए माफ नही करूंगा। मुझे झूठ से सख्त नफरत है। जाओ तुम्हे सल्तनत छोड़ने की सजा देता हूँ। सिपाहियों ले जाओ इसे।

सेवक – जहाँ पना मुझे माफ़ कर दो मैं बहुत घबरा गया था, मुझे इतनी बड़ी सजा मत दो जहाँ पना रहम! जहाँ पना रहम!

और सिपाही उसे खींचता हुआ ले गया, फिर अगले दिन राजा अकबर ने अपने दरबार मे ये किस्सा सुनाया। दरबार में बैठे सभी लोगो ने अकबर की इस बात की तारीफ की। वाह! जहाँ पना आपने बहुत अच्छा किया। झूठ कभी नही बोलना चाहिए। सभी लोग कहने लगे हमने तो कभी झूठ नही बोला। जहाँ पना बीरबल खामोश बैठे रहते हैं, अकबर बीरबल से पूँछते हैं।

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अकबर – बीरबल क्या हुआ तुम ख़ामोश क्यों हो? तुम्हारा क्या कहना है? क्या तुमने कभी झूठ बोला है?

बीरबल – जहाँ पना ऐसा कोई नही होता जो कभी जिंदगी में झूठ न बोले कभी न कभी तो इंसान को झूठ बोलना ही पड़ता है। कभी-कभी इंसान इसलिए झूठ बोलता है कि हमारे सच से किसी को तकलीफ न हो। अपने आप को शर्म से बचाने के लिए भी इंसान झूठ बोलता है। इंसान को कभी न कभी झूठ बोलना ही पड़ता है। मैं कैसे कह दूं कि मैंने कभी झूठ नही बोला।

अकबर – क्या, क्या😱! मैं ये समझू मेरे नौ रत्नों में से एक रत्न झूठा है। इस सल्तनत में सभी के लिए कानून बराबर है। जाओ तुम इस दरबार से निकल जाओ।

बीरबल – लेकिन जहाँ पना मेरी बात तो सुनिए!

अकबर – हम कुछ नही सुनना चाहते हैं, चले जाओ!

तभी बीरबल वहाँ से चले जाते हैं।

फिर क्या था बीरबल अब सोचने लगे के जहाँ पना को अब कैसे समझाया जाए। फिर क्या था बीरबल अपना दिमाग चलाने लगे और बहुत सोचने के बाद उन्होंने एक गेँहू की बाली ली और सेवक को बुलाया और सेवक से कहा –

बीरबल – सेवक राम ये गेहूँ की बाली लो और शहर का सबसे अच्छा सुनार ढूंढो और एक ऐसी ही गेहूं की बाली सोने की बनबा कर लाओ, ध्यान रहे गेहूँ के दानों से लेकर बाली तक सभी सोने का होना चाहिए।

सेवक – जी हुजूर मैं अभी जाता हूँ।

और कुछ दिन बाद वो सोने की डाली लेकर अकबर के दरबार मे गए।

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अकबर – तुम्हारी हिम्मत कैसे हुइ दरबार में आने की तुम्हे यहाँ आने से मना किया था न।

बीरबल – जहाँ पना मैं यही किसी औधे की हैसियत से नही बल्कि मैं एक नागरिक की हैसियत से आया हूँ। मैं आपको दुनिया की सबसे अमीर सल्तनत का बादशाह बनाना चाहता हूँ। ये देखिए सोने के गेहूं की बाली।

अकबर और वहाँ मौजूद सभी लोग बहुत हैरान होकर उस बाली को देखते हैं। अकबर कहते है –

अकबर – ये तो सचमुच सोने की बाली है ये तुम्हे कहाँ मिली?

बीरबल – जहाँ पना ये कोई साधारण बाली नही है, ये मुझे एक ज्योतिषी ने दी थी, जो बहुत कड़ी तपस्या के बाद उन्हें मिली थी। जहाँ पना वो कोई साधारण ज्योतिष नही था, एक दिन वो जयोतिष मुझे नदी के किनारे मिला और वो ज्योतिष वहां नदी के पानी के ऊपर चल रहा था। इस तरह से जिस तरह हम जमीन पर चलते हैं।

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अकबर हैरान होकर पूछते हैं –

अकबर – अच्छा इतने महान ज्योतिष हैं तो फिर चलो देर कैसी है इसे अभी खेत मे बो देते हैं।

बीरबल – हाँ-हाँ जहाँ पना मैंने इसका इंतेज़ाम पहले ही कर रखा है। मैंने एक बहुत अच्छी जगह इसके लिए देख रखी है। हम कल सुबह इस बाली को वहाँ बोएंगे।

अकबर – हाँ बीरबल हम कल सुबह ही इस बाली को बोयेंगे
और ये सब को बता देना की हम ये सोने की बाली उस उपजाऊ ज़मीन पर बोने वाले हैं।

बीरबल – जी जहाँ पना मैं कल सुबह ही आ जाऊंगा सब को ले कर।

फिर अगले दिन अकबर और बीरबल बहुत से लोगो के साथ उस जगह पर आते हैं।

बीरबल – जहाँ पना ये है वो जगह जिसके बारे में मैं आपको बता रहा था।

अकबर – बीरबल तो देरी क्या है इस बाली को जाकर बो दो।

बीरबल – मैं नही जहाँ पना, मैं इसे नही बो सकता हूँ। क्योंकि इस बाली को वही बो सकता है, जिसने कभी झूठ नही बोला हो। मैंने तो कई बार झूठ बोला है। आप ये काम किसी और से करबा लीजिये।

अकबर वहाँ खड़े लोगों से पूछते हैं –

अकबर – क्या आप में से कोई है जिसने कभी झूठ नही बोला है।

वहाँ खड़े सभी लोग चुप रहते हैं, कोई आगे नही आता है।

अकबर – हमे ये उम्मीद नहीं थी।

बीरबल – जहाँ पना अब आप ही एक ऐसे शख्स हैं, जिसने कभी झूठ नही बोला। आप ही इस बाली को बो दीजिये।

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अकबर बहुत हिचकिचाते हैं और कहते हैं –

अकबर – मैं, मैं कैसे, मैने भी कभी न कभी तो झूठ बोला है, बचपन में या फिर कभी और।

बीरबल – जी जहाँ पना मेरे कहने का भी मतलब वही था। इंसान को कभी न कभी झूठ बोलना ही पड़ता है। या किसी को ठेस न पहुंचे इसलिए या फिर शर्मिदा न होना पड़े। कभी इसलिए और कभी कभी किसी अच्छे काम के लिए भी झूठ बोलना पड़ता है।

और हाँ जहां पना मैंने वह बाली शहर के सुनार से बनबाई थी। ये मुझे किसी ज्योतिष ने नही दी थी। मैंने आप को समझाने के लिए ऐसा किया था।

अकबर – हमे माफ कर दो बीरबल हमे ऐसा नही करना चाहिए। हम आपको निर्दोष करार करते हैं। तुम हमारे सच्चे मित्र हो हम समझ गए बीरबल।

और इस तरह अकबर को अपनी गलती का एहसास हो गया। और अकबर ने उस सेवक को भी माफ कर दिया जिससे वह फूलदान टूटा था।


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#03 स्वर्ग का रास्ता

एक दिन शहंशाह अकबर नाई से अपनी हजामत बनबा रहे थे। तभी वह नाइ शहंशाह अकबर की तारीफ करने लगता है –

नाई – जहाँ पना आप अपनी सल्तनत में सबका ख्याल रखते हैं बच्चे, बड़े, गरीब, लाचार आदि सबका।

अकबर – शुक्रिया!

नाई – लेकिन, जहाँ पना!

अकबर – लेकिन, लेकिन क्या, क्या हम किसी को भूल रहे हैं, जिसकी हम देख भाल नही करते हैं?

नाई – जहाँ पना गुस्ताखी माफ करें, क्या कभी आपने बड़े-बूढों यानी कभी अपने पूर्वजों के बारे में सोचा है, जो दुनिया छोड़ कर स्वर्ग चले गए हैं।

अकबर – लेकिन हम तो उनका भी ख्याल रखते हैं, उनके हक में हम दुआ करते हैं, उनकी याद में हमने शाही मकबरे बनवाये है।

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नाई – लेकिन जहाँ पना कभी आपने किसी को स्वर्ग भेजा है, अपने पूर्वजों की खबर लेने के लिए, उन्हें किसी चीज़ की वहाँ ज़रूरत तो नही है।

अकबर – क्या, ये क्या कह रहे हो, कोई स्वर्ग जाकर बापस कैसे आ सकता है, तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है क्या। कोई स्वर्ग की यात्रा करके बापस कैसे आ सकता है।

नाई – जहाँ पना मैं सच कह रहा हूँ, स्वर्ग की यात्रा करके बापस आ सकता है, मैं एक ऐसे योगी बाबा को जानता हूँ, जो स्वर्ग भेज कर बापस बुला सकते हैं। बजीर अब्दुल्ला उनके भक्त हैं। आप चाहे तो बज़ीर अब्दुल्ला से कहे कर आप उस योगी को बुला सकते हैं।

अकबर – ठीक है तुम कल ही बज़ीर अब्दुल्ला से कह कर उस योगी को बुलाओ।

फिर अगले दिन बज़ीर अब्दुल्ला उस योगी बाबा को लेकर आते हैं।

अकबर – बज़ीर अब्दुल्ला क्या योगी बाबा दरबार में आ गए हैं।

बज़ीर अब्दुल्ला – जी! जहाँ पना वो दरबार के बाहर ही खड़े हैं। आपकी इज़ाज़त हो तो उन्हें बुलाया जाए।

अकबर – जी बज़ीर अब्दुल्ला उन्हें बुलाया जाए।

योगिराज निरंजन बाबा दरबार मे हाज़िर होते हैं।

योगिराज – अलख निरंजन, मेरा नाम योगी निरंजन बाबा है।

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अकबर – हमने सुना है योगी जी आप किसी को भी स्वर्ग भेज कर बापस बुला सकते हैं ये बात सच हैं।

योगिराज – हाँ मैं किसी को भी स्वर्ग भेज कर बापस बुला सकता हूँ।

अकबर – हमें भी अपने पूर्वजों के बारे में जानकारी चाहिये, वह स्वर्ग में कैसे रह रहे हैं, उन्हें वहाँ किसी चीज़ की ज़रूरत तो नही है।

योगिराज – आप किसी भरोसे मन्द इंसान को स्वर्ग भेज सकते हैं, जो स्वर्ग के मोह में न फस कर बापस आ सके।

बज़ीर अब्दुल्ला – जहाँ पना आप बीरबल को इस काम के लिए भेज दीजिए, बीरबल से ज़्यादा भरोसेमंद और कौन हो सकता है।

अकबर – बीरबल क्या आप हमारे लिए स्वर्ग जाएंगे।

बीरबल – जी! जहाँ पना मैं स्वर्ग जरूर जाऊंगा। लेकिन उससे पहले मैं निरंजन बाबा से कुछ पूछना चाहता हूँ। योगी राज़ इस यात्रा में कितना समय लगेगा।

योगिराज – इस यात्रा में कम से कम दो महीने लगेंगे अगर तुम स्वर्ग के सुख के मोह में न फसों तो।

बीरबल – योगी जी आप मुझे स्वर्ग कैसे भेजेंगे।

योगिराज – मैं एक पवित्र आग जलाऊंगा उसमे तुम्हे प्रबेश करना है, वैसे तो ये क्रिया कहीं भी हो सकती है, लेकिन हम इसे गंगा नदी के किनारे करेंगे।

बीरबल – जहाँ पना मैं काफी दिनों के लिए अपने घर से दूर रहूंगा। इसलिए मैं चार पांच दिन की मोहलत मांगता हूं, कुछ अधूरे काम निपटाने है।

अकबर – ठीक है बीरबल, योगिराज जी आप ये काम पांच दिन बाद सम्पन करें।

अब पांच दिन बाद बीरबल को जलाने के लिए ले जाया जाता है। स्वर्ग की यात्रा के लिए योगिराज विधि सम्पन्न करते हैं। वह एक चिता पर फूल और कुछ सामिग्री डालते हैं और बीरबल के माथे पर तिलक करते हैं और चित्त हो जाने को कहते हैं।

बीरबल – अलबिदा! जहाँ पना।

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अकबर – हमे आपकी बहुत याद आएगी आप जल्दी लौटने की कोशिश करना।

बीरबल – जी जहाँ पना, मैं जल्दी लौट कर आऊंगा।

और फिर दो महीने गुज़र जाते हैं, शहंशाह अकबर बहुत चिंतित हो जाते हैं।

अकबर – हमे बीरबल की बहुत याद आ रही है, दो महीने गुज़र चुके पर बीरबल अभी तक नही लौटे, हमे बहुत चिंता हो रही है। योगिराज का क्या कहना है, कब तक बीरबल लौट आएंगे।

बज़ीर अब्दुल्ला – जहाँ पना, योगी बाबा ये भी तो कह रहे थे हो सकता है बीरबल को स्वर्ग के सुख बहुत भा गए हों और वह उन्हें छोड़ कर न आना चाहें।

अकबर – नही ऐसा कभी नही हो सकता है, बीरबल ऐसा कभी नही कर सकते हैं, उन पर हमें पूरा भरोसा है।

उसी वक्त वहां पर बीरबल आते हैं। उनके लम्बे लम्बे बाल होते हैं। लम्बी सी दाड़ी अकबर उन्हें देख कर बहुत खुश होते हैं।

अकबर – खुशामदी! खुशामदी! हमे आपको देख कर बहुत खुशी हुई और बताइए स्वर्ग में हमारे पूर्वज कैसे हैं, उन्हें किसी चीज की वहाँ जरूरत तो नही है।

बीरबल – नही, जहाँ पना उन्हें किसी भी चीज़ की ज़रूरत नही है, वे वहां बहुत खुश हैं।

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अकबर – लेकिन बीरबल आपने ये बाल इतने क्यों बड़ा लिए हैं।

बीरबल – जहाँ पना मेरे ही नही वहां पर सभी के बाल बहुत लंबे हैं। वहाँ पर कोई नाई नही है बाल काटने के लिए। इसलिए उन सभी ने यहाँ पर जो नाई है उसे बुलाने के लिए कहा है ताकि वो वहाँ सबके बाल काट सके ।

अकबर – हाँ, हाँ क्यूँ नही, हम अभी अपने नाई को वहाँ भेज रहे हैं। योगिराज़ और वह नाई अभी यहीं पर हैं, वो इस वक्त हमारे मेहमान बन कर रह रहे हैं। हम अभी स्वर्ग भेजने की क्रिया करबाते हैं, योगिराज और उस नाई को बुलाते हैं।

वो दोनों दरबार मे हाज़िर होते हैं, अकबर उनसे कहते हैं-

अकबर – योगिराज स्वर्ग में नाई की ज़रूरत है, आप जल्दी से इस नाई को स्वर्ग भेजने की क्रिया शुरू कीजिए।

नाई – (अपने घुटनों पर गिर कर), जहाँ पना मुझे माफ़ कर दीजिए, मुझसे ये सब बज़ीर अब्दुल्ला ने करवाया था। क्योंकि वह बीरबल की शोहरत से जलते हैं और बीरबल को अपने रास्ते से हटाना चाहते थे और ये बाबा भी पाखंडी है। पता नही बीरबल उस आग से कैसे बच गए, लेकिन मैं नही बचूंगा, मुझे माफ़ कर दीजिये

अकबर – क्या, इतनी बड़ी साजिश बीरबल के खिलाफ! सिपाहियों इस पाखंडी बाबा और इस नाई को ले जाओ और काल कोठरी में डाल दो। और तुम बज़ीर अब्दुल्ला मुझे तुम से ये उम्मीद नही थी। मैं अगर चाहूँ तो तुम्हे अभी फांसी पर लटका दूँ, लेकिन तुमने हमारी कई साल हिफाज़त की है, इसलिए हम तुम्हें इस देश से निकाल देते हैं।

सिपाहियों इसे ले जाकर सरहद के बाहर छोड़ आओ और फिर कभी अपनी शक्ल मत दिखाना।

अच्छा बीरबल मेरे बुद्धिमान दोस्त ये बताओ तुम्हे इस साजिश का कैसे पता लगा।

बीरबल – जहाँ पना जब मैंने योगिराज के मुँह अगम प्रवेश करने वाली बात सुनी तो मुझे लगा दाल में कुछ काला है। तभी तो मैंने आपसे पांच दिन की मोहलत मांगी और मैंने उन पांच दिनों में एक ऐसी सुरंग तैयार करवाई जो उस जगह से सीधे मेरे घर को जाती है।

जहाँ पना जब योगिराज ने आग जलाई तो मैं सीधे उस सुरंग पर खड़ा था, जो मेरे घर को जाती है, योगिराज के आग जलाते ही मैं सुरंग का दरबाजा खोल कर अपने घर पहुंच गया।

जहाँ पना इस तरह से मैं वहां से बच निकला। और मैं चाहता था, ये लोग अपना गुनाह खुद कुबूल करें इसलिए मैंने दो महीने अपने बाल नही काटे, क्योंकि मैं ये भी जानता था कि इन तीनो में सबसे कमज़ोर कड़ी नाई है।

अकबर – वाह! बीरबल वाह! एक तुम ही हो जो ऐसा कर सकते हो। तुम्हारे जैसा कोई नही! मेरे शातिर दोस्त तुम ही ऐसा कर सकते हो। वाह! बीरबल वाह!

बीरबल – शुक्रिया! जहाँ पना शुक्रिया!


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#04 दुनिया का सबसे खूबसूरत बच्चा

शहंशाह अकबर अपनी सल्तनत में सभी का बहुत अच्छे से ख्याल रखते थे। कोई उनकी सुविधाओं से वंचित न रहे जाए इसलिए वह वहाँ भेष बदल बदल कर घूमा करते थे। और लोगो के बीच जाकर लोगों की परेशानियों का अनुभव करते थे, कि कोई उनकी सल्तनत में दुखी तो नही है। अकबर एक बहुत ही अच्छे शहंशाह थे।

एक दिन शहंशाह अकबर अपने दरबार मे अपने बेटे को गोद मे खिला रहे थे। अकबर का बेटा बहुत खूबसूरत था। लोग उसे देखते ही तारीफ किये बिना नही रहते थे। जब अकबर अपने बेटे को खिला रहे थे, तो दरबार मे बैठे सभी लोग उसकी तरीफ़ करने लगे।

दरबारी – जहाँ पना आपका बेटा दुनिया का सबसे खूबसूरत बच्चा है, शहज़ादे जैसा दुनिया मे और दूसरा कोई बच्चा नहीं है।

अकबर – हाँ मुझे भी ऐसा ही लगता है, शहज़ादे जैसा कोई नही, वह सबसे खूबसूरत है।

दरबारी – हाँ, हाँ जहाँ पना बिल्कुल।

अकबर – तुम क्या कहते हो बीरबल, तुम्हे क्या लगता है? हमारा शहज़ादा दुनिया का सबसे खूबसूरत बच्चा है।

बीरबल – जहाँ पना मुझे ऐसा नहीं लगता, लेकिन मैं ये नही कह रहा शहज़ादे खूबसूरत नही है।

अकबर – क्या, क्या तुम्हें ऐसा लगता है हमारे शहज़ादे खूबसूरत नही है।

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बीरबल – नही जहां पना मैंने ऐसा तो नही कहा, मेरी बात को आप गलत मत समझीये, मेरे कहने का मतलब है शहज़ादे खूबसूरत तो हैं, लेकिन पूरी दुनिया में सबसे खूबसूरत हैं मैं इस बात को नही मानता।

अकबर – क्या तुम्हारे कहने का मतलब है शहज़ादे पूरी दुनिया मे सबसे खूबसूरत नही है।

बीरबल – जी जहाँ पना मेरे कहने का वही मतलब है। मुझे लगता है दुनिया में शहज़ादे ही ऐसे नही है जो सबसे खूबसूरत हैं।

अकबर – बीरबल आज तुमने हमारे दिल को बहुत ठेस पहुँचाई है। तुम साबित करके दिखाओ शहज़ादे से भी ज़्यादा और कोई खूबसूरत बच्चा है, उसे हमारे सामने पेश करो।

बीरबल – जी जहाँ पना मुझे लगता है और मुझे पूरा भरोसा है, मैं इस बात को साबित कर सकता हूँ।

अकबर – जाओ तुम इस बात को साबित करके दिखाओ और जबतक मुझे अपनी शक्ल मत दिखाना।

और फिर क्या था बीरबल शहज़ादे से भी ज़्यादा खूबसूरत बच्चे की तलाश में निकल गए। फिर कुछ दिनों बाद बीरबल दरबार मे हाज़िर होते हैं।

अकबर – आओ बीरबल! तुम आ गए! क्या तुम्हे शहज़ादे से ज़्यादा खूबसूरत बच्चा मिला। तुम खाली हाथ लौटे अब तो तुम मानते हो शहज़ादे जितना खूबसूरत और कोई नही।

बीरबल – जहाँ पना मैं ये बताने दरबार में आया हूँ मैंने शहज़ादे से खूबसूरत बच्चा ढूंढ लिया है।

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अकबर – क्या🙄! ढूंढ लिया है, तो उसे दरबार मे क्यों नही लाये, वो यहां क्यों नही आया।

बीरबल – जहाँ पना मैं उस बच्चे को तो यहाँ नही ला सका, लेकिन मैं आपको वहाँ ज़रूर ले जाऊँगा ताकि आप कुछ समझ पाएं।

अकबर – क्यों बीरबल, बच्चा यहाँ क्यूँ नही आ सकता? अच्छा ठीक है, मैं ही वहाँ जाऊंगा, हम कल सुबह ही वहाँ जाएंगे।

बीरबल – जी जहाँ पना हम कल सुबह ही वहाँ जाएंगे।लेकिन जहाँ पना हमे वहां पर भेष बदल कर जाना होगा।

अकबर – ठीक है बीरबल!

शहंशाह अकबर और बीरबल अगली सुबह ही उस बच्चे के पास जाते हैं। वो बच्चा बहुत ही गरीब होता है और छोटी सी झोपड़ी में रहता है और वह वहाँ मिट्टी में खेलता होता है।

बीरबल – जहाँ पना वो रहा दुनिया का सबसे खूबसूरत बच्चा।

अकबर – ये क्या तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है, जो इतने बदसूरत बच्चे को दुनिया का सबसे खूबसूरत बच्चा बता रहे हो।

ये बात सुनकर बच्चा बहुत ज़ोरों से रोता है, तभी उसी समय उस बच्चे की माँ उस झोपड़ी से निकल कर बहर आती है। अकबर की ये बात सुनकर अकबर से कहती है।

बच्चे की माँ – तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे बच्चे को बदसूरत कहने की, मेरा लाल दुनिया का सबसे खूबसूरत बच्चा है। आज के बाद तुमने ऐसी बात कही तो मैं तुम्हारी हड्डी पसली तोड़ दूंगी। चले जाओ यहाँ से आज के बाद अपनी सूरत मत दिखाना।

उस बच्चे की माँ ये बात कह कर बच्चे को जोर जोर से खिलाने लगी अरे, अरे, मेरा लाल, मेरा बच्चा, मेरा बच्चा दुनिया का सबसे खूबसूरत बच्चा है।

उस बच्चे की ये बात सुनकर अकबर बिल्कुल खामोश हो गए।

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बीरबल – कुछ समझ आया जहाँ पना।

अकबर – हाँ, बीरबल मैं अच्छी तरह समझ गया।

बीरबल – माँ बाप के लिए उसका बच्चा चाहे कैसा भी हो, वो उसके लिए दुनिया का सबसे खूबसूरत बच्चा होता है।

अकबर – तुम सही कह रहे हो बीरबल, हर माँ बाप के लिए अपना बच्चा खूबसूरत होता है।

बीरबल – मेरे कहने का मकसद सिर्फ इतना था के आप दुनिया की चापलूसी में न फंसकर शहज़ादे को अच्छी तालीम दें। मैं तो सिर्फ आपका भला चाहता हूँ।

अकबर – बीरबल तुमने एक बार फिर ये साबित कर दिया तुम हमारे सच्चे दोस्त हो। तुमने बिना डरे हमे इस बात को समझाया। बहुतखूब बीरबल! बहुत खूब!

बीरबल – शुक्रिया जहाँ पना।


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(Most Popular) #05 बीरबल की खिचड़ी

एक दिन की बात है, जब शहंशाह अकबर अपने बगीचे में बीरबल के साथ घूम रहे थे। बहुत ठंड पड़ रही थी।

बीरबल – इस साल बहुत ठंड पड़ रही है, ऐसे में काम करने के लिए भी लोगों को घर से बाहर निकलना पड़ रहा होगा, लेकिन लोगो को काम तो करना पड़ता ही है।

अकबर तालाब के पास बैठ कर तालाब के पानी को हाथ मे लेते हैं और कहते हैं –

अकबर – ये पानी तो बर्फ की तरह है, सही बात है ऐसे में कौन घर से बाहर निकलता होगा।

बीरबल – नही जहाँ पना ऐसे भी लोग हैं जो इतनी ठंड में भी थोड़े से पैसों के लिए भी कड़ी मेहनत करते हैं।

अकबर – बीरबल हर वक्त तुम्हे मेरी बात काटना ज़रूरी है। मैं नही मानता इतनी ठंड में कोई अपनी जान खतरे में डालेगा। ये तो नामुमकिन है। ऐसा कोई कैसे कर सकता है।

बीरबल – जहाँ पना आपके राज्य में ऐसे लोग हैं, जो अपने हालात की वजह से कोई भी मुश्किल काम कर सकते हैं। और अकबर और बीरबल दोनों में बहस छिड़ गई।

अकबर – मैं नही मानता, अगर बीरबल तुम सही हो तो इस बात को साबित करके बताओ। इस तालाब के ठंडे पानी मे कोई है जो पूरी रात खड़ा हो सकता है। उसे हमारे सामने पेश करो। हम उसे दस सोने की अशर्फियाँ देंगे।

बीरबल – जी! जहाँ पना मैं ऐसा कोई तलाश ज़रूर कर लूंगा, जो इतने कम दाम पर भी रात भर इस तालाब के ठंडे पानी मे खड़ा रहे सकता है। जहाँ पना मैं आज शाम तक ही ऐसा कोई आदमी ढूंढ लूंगा।

अकबर – हाँ! बीरबल जाओ शाम तक ऐसा आदमी मिल जाये तो हमारे दरबार में हाज़िर हो जाना, हमे पूरा यकीन है इस बार तुम गलत साबित होगे।

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बीरबल – शहंशाह अकबर के दरबार मे उस आदमी को लेकर हाज़िर होते हैं जो उस तालाब के ठंडे पानी मे रात भर खड़ा होगा।

अकबर – बीरबल क्या तुम्हें ऐसा कोई इंसान मिला जो रात भर उस तालाब में खड़ा होगा।

बीरबल – जी! जहाँ पना मुझे ऐसा एक इंसान मिल गया है, सिपाही गंगा राम को बुलाओ।

गंगा राम दरबार में हाज़िर होता है।

अकबर – गंगा राम क्या तुम्हें बीरबल ने सब कुछ समझा दिया कि तुम्हे क्या करना है।

गंगाराम – जी! जहाँ पना मुझे मालूम है, मुझे आपके बगीचे के तालाब में पूरी रात खड़ा होना है।

अकबर – क्या तुम्हें डर नही लगता, तुम क्यूँ अपनी जान गबाने पर लगे हो, क्या तुम्हें अंदाज़ा भी है कि उस तालाब का पानी कितना ठंडा है।

गंगाराम – जी जहाँ पना मुझे इस बात का अंदाज़ा है, लेकिन फिर भी मैं ये काम कर सकता हूँ।

अकबर – ठीक है! फिर अगर तुम जिंदा रहे तो कल सुबह मिलना। सिपाहियों आज रात इसकी खूब खातिरदारी करना, क्या पता इसकी ये आखरी रात हो। इस पर नज़र रखने के लिए वो भी बहुत सख्ती से।

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अगले दिन सुबह अकबर के दरबार मे –

अकबर – तो बीरबल क्या हाल हैं, उस इंसान की रात कैसे कटी?

बीरबल – जी जहाँ पना आप खुद ही देख लीजिए।

सिपाहियों गंगाराम को बुलाया जाए –

अकबर – तो गंगाराम कैसी कटी रात, पूरी रात वक्त बिताने के लिए क्या किया?

गंगाराम – जहाँ पना मुश्किल तो थी पर ऊपर वाले का नाम लेकर जैसे-तैसे कट गई। शुरू में थोड़ा मुश्किल लग रहा था और ठंड भी बहुत लग रही थी। फिर मेरी नज़र वहां से दूर एक दिये (चिराग) पर पड़ी, बस फिर उसे देख-देख कर और ऊपर वाले का नाम लेकर पूरी रात कट गई।

अक़बर – क्या😨, अच्छा तो तुम्हे उस दिए (चिराग) कि गर्मी मिल रही थी, इसलिए तुम्हारी पूरी रात उस ठंडे पानी मे कट गई, तुम हमसे धोखा कर रहे हो।

गंगाराम – लेकिन, लेकिन जहाँ पना।

अकबर – हम तुम्हे इस धोखे के लिए सज़ा भी दे सकते हैं, लेकिन हम समझते हैं रात भर ठंडे पानी मे खड़ा होना मुश्किल रहा होगा। लेकिन ईनाम के बारे में तो भूल जाओ। सिपाहियों इसे ले जाओ यहां से।

बीरबल का चेहरा बहुत उदास हो जाता है।

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अकबर – तो क्या कहते हो बीरबल, इस बार तुम गलत साबित हुए, चलो कभी न कभी इंसान से गलती हो ही जाती है।

बीरबल – जी जहाँ पना मैं गलत साबित हुआ। जहाँ पना मैं कुछ घरेलू परेशानी की वजह से कहर जाना चाहता हूँ। मैं दोपहर तक लौट आऊंगा।

अकबर – ठीक है! बीरबल जल्दी लौटने की कोशिश करना। बहुत सारी कार्यवाही करनी है।

फिर दोपहर को बीरबल नही पहुंचते हैं –

अकबर – बीरबल अभी तक नही आये हैं, सिपाहियों जाओ और बीरबल से कहो दरबार में जल्दी पहुचें।

सिपाही खाली हाथ लॉट कर आता है –

अकबर – सिपाही तुम खाली हाथ कैसे लौट कर आ रहे हो, बीरबल कहाँ हैं?

सिपाही – जहाँ पना बीरबल खाना खा रहे हैं, वह कहे रहे थे खाना खाकर आएंगे।

अकबर – ये हो क्या गया है बीरबल को, बीरबल कभी इतनी देर से खाना खाते तो नही हैं। तुम दोबारा जाओ बीरबल ने खाना खा लिया होगा।

सिपाही – जी! जहाँ पना।

सिपाही फिर बीरबल को साथ लाये बिना ही आता है.

अकबर – तुम फिर बीरबल को साथ नही लाये।

सिपाही – जहाँ पना वो (बहुत हिचकिचाते हुए ), जहाँ पना बीरबल कह रहे हैं अभी मेरा खाना तैय्यार नही हुआ। जब वह पक जाएगा मैं दरबार मे हाज़िर हो जाऊंगा।

शहंशाह अकबर कुछ समय तक सोचते हैं फिर कहते हैं –

अकबर – हूँ🤔, हम खुद बीरबल के घर जाएंगे।

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और फिर अकबर अपने सिपाहियों के साथ बीरबल के घर रबाना हो जाते हैं। बीरबल के घर जाकर अकबर को एक अजब माजरा दिखाई देता है। एक हांडी में बहुत ऊँचाई पर खिचड़ी पक रही होती है। ये माज़रा देखकर अकबर को बहुत हैरत होती है और वह बीरबल से पूछतें हैं –

अकबर – बीरबल तुम ये क्या कर रहे हो, इस हांडी को इतने ऊपर क्यूँ लटकाया है।

बीरबल – जहाँ पना मैं इसमे खिचड़ी पका रहा हूँ।

अकबर – क्या, बीरबल तुम्हारा दिमाग तो ठीक है। आग से इतनी ऊंचाई पर जब हांडी लटकी होगी तब खिचड़ी कैसे बनेगी।

बीरबल – जहाँ पना मुझे पूरा यकीन है खिचड़ी पक जाएगी। जब गंगाराम को इतने दूर जल रहे दिए से गर्माहट मिल सकती है, तब ये हांडी कुछ ही आग से दूर रखी है, फिर खिचड़ी क्यूँ नही बन सकती।

अकबर – अच्छा बाबा मैं हारा तुम जीते तुम अपने आदमी को लेकर दरबार मे पहुँचो उसे उसका इनाम मिल जायेगा।

और फिर बीरबल गंगाराम को लेकर दरबार मे हाज़िर होते हैं।

अकबर – गंगाराम हमे माफ करदो ऐसे सुलूक के लिए ये लो अपना ईनाम।

गंगाराम – शुक्रिया जहाँ पना इज्जत देने के लिये।

अकबर – और बीरबल ये लो तुम्हारा ईनाम हमे इस बात को बहुत ही अजीब तरीके से समझाने के लिए।

बीरबल – शुक्रिया जहाँ पना!


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#06 जादुई गधा

एक दिन शहंशाह अकबर ने अपनी रानी को बहुत बेष कीमती हार तोहफे में दिया। रानी उस बेष कीमती हार को देखकर बहुत खुश हुईं।

अकबर – ये लीजिये आपके लिए हमारी तरफ से ये तोहफा।

रानी – ये तो बहुत खूबसूरत है। ऐसा हार तो मेरे पास एक भी नही है। मुझे ये बहुत पसंद आया, बहुत खूबसूरत है।

अकबर – हाँ रानी हो भी क्यूँ न खूबसूरत। मैंने इसे खास कारीगरों से बनबाया है। खास आपके लिए।

रानी – ये मुझे बहुत पसंद है। इसे मैं हमेशा अपने पास रखूंगी। इसे अपने से अलग नही होने दूंगी। मैं बहुत खुशनसीब हूँ जहाँ पना।

अकबर – हमे बहुत खुशी हुई, आपको ये हार पसंद आया। आप इसे जब भी पहनेगीं इसमें हमे आपका प्यार नज़र आएगा।

रानी – शुक्रिया जहाँ पना!

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फिर जब सुबह को रानी सोकर उठती हैं और नहा कर तैयार होती हैं, तो उन्हें अपना हार नही मिलता है। वह बहुत दुखी हो जाती हैं।

रानी – कहां गया हार अभी तो यहीं रखा था, रात जब मैं सोई थी तभी मैंने उसे यहीं रखा था, कहां चला गया, मेरा हार कहीं खो गया। दासियों, दासियों कोई है यहाँ।

रानी के बुलाने पर वहाँ एक दासी आती है।

दासी – क्या हुआ महारानी जी!

रानी – हमारा हार कहीं खो गया है, हमे उसे ढूंढने में मदद कीजिए, रात सोने से पहले हमने उसे यहीं रखा था, लेकिन अब वह वहां नही है।

दासी – महारानी जी आप कोई दूसरा हार पहन लीजिये, आपके पास तो कई हार हैं।

रानी – नही, नही बिल्कुल नहीं, वो हार बहुत खास हार है। हमे वो जहाँ पना ने बहुत प्यार से दिया था। हमे वही हार चाहिए, कोई और दूसरा नही चाहिये।

ये बात कह कर रानी मायूस होकर बैठ जाती हैं, तभी वहाँ थोड़ी ही देर में अकबर आते हैं –

अकबर – क्या हुआ आपको, आप इतनी उदास क्यों बैठी हैं?

रानी – जहाँ पना, वो.. जहाँ पना आपने जो हार हमे तोहफे में दिया था, वो कहीं खो गया है।

अकबर – खो गया है, क्या मतलब खो गया है, आप कहना क्या चाहती हैं, कहीं वो आपने गिरा तो नही दिया।

रानी – जहाँ पना मैंने रात सोने से पहले उसे यहीं उतार कर रखा था, फिर न जाने वो कहाँ चला गया। जहाँ पना हमे माफ कर दीजिए, हम आपके तोहफे की हिफाज़त नही कर पाए। (और वह रोने लगीं)

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अकबर – महारानी आप रोये मत। वो बस मामूली सा तोहफा था, हम आपके लिए और उससे भी अच्छा हार बनबा देंगे और हम आपसे वादा करते हैं। और हम आपको वो हार भी ढूंढ कर देंगे। बस आप परेशान न हों। आज आप हमारे कमरे में ही ठहर जाइये।

सिपाही तुम और दूसरे सिपाहियों और दासियो को लेकर जाओ और पूरे रानी के कमरे के हर एक कोने में जाकर ढूंढो हार को।

सिपाही – वो…वो, जहाँ पना महल के दूसरे हिस्सों में भी चोरियां हो चुकी हैं। हम सभी ने उस चोर को पकड़ने की बहुत कोशिश की, लेकिन न कामयाब हुए। आज तक उस चोर को हम नही पकड़ पाए।

अकबर – क्या🙄, महल के दूसरे हिस्सों में भी चोरी हो चुकी है, इसकी खबर हमे क्यूँ नही दी गयी। जाओ पहले हार महारानी के कमरे में ढूंढो, अगर वहाँ नही मिलता है तो हम कुछ और सोचेंगे।

(तभी सिपाही थोड़ी देर बाद आता है)

सिपाही – जहाँ पना हम सबने हार सब जगह ढूंढ लिया लेकिन हार कहीं नही मिला।

अकबर – अब मामला गम्भीर है, अब सिर्फ बीरबल ही इस मामले को सुलझा सकते हैं। सिपाहियों बीरबल को अभी हमारे पास बुलाया जाए, हमे वो हार आज रात ही चाहिये।

(बीरबल थोडी ही देर में वहाँ हाज़िर होते हैं )

बीरबल – जहाँ पना आपने इतनी रात गए मुझे याद क्यूँ किया?

अकबर – दरसल बीरबल बात ये है, हमने अपनी रानी को तोहफे में एक बेष कीमती हार दिया था, लेकिन रानी जब सुबह उठीं तो हार वहां नही था। रानी बहुत उदास हैं, हम उन्हें उदास नही देख सकते। आपको हार आज रात ही ढूंढना होगा।

बीरबल – अच्छा तो ये मामला है, जहाँ पना एक बात तो पक्की है, चोर कोई सिपाहियों और दासियों में से ही है। इस बात का पता लगाने के लिये मुझे अपने एक दोस्त को बुला कर लाना पड़ेगा।

अकबर – दोस्त, कौन-सा दोस्त और आप क्यों जाना चाहते हैं, हमे बताइए हम आपके दोस्त को बुलबा देते हैं।

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बीरबल – नही जहाँ पना उसको बुलाने सिर्फ मैं ही जा सकता हूँ। मेरा दोस्त कोई ऐसा-वैसा दोस्त नही है, उस पर जादुई शक्तियां हैं, जो हमे चोर को पकड़ने में मदद करेंगी।

अकबर – जाइये बीरबल अब तो हम भी आपके उस दोस्त से मिलने के लिय बेसब्री से इंतजार करेंगे।

बीरबल – जहाँ पीना आप बस रानी के कमरे में पहरा देने बाले सिपाही और दासियों को बुलबाइये, मैं अभी अपने दोस्त को लेकर आता हूँ।

तभी थोड़ी देर में बीरबल एक गधे को लेकर महल में आते हैं। ( ढेंचू, ढेंचू, ढेंचु ,ढेंचू 😂)

अकबर – बीरबल, ये क्या मजाक है, हमने तो तुम्हे तुम्हारा दोस्त लाने को कहा था, ये तो गधा है।

बीरबल – जी जहाँ पना यही है मेरा दोस्त, जिसे जादुई शक्ति आती हैं, यही हमारी चोर पकड़ने में मदद करेगा।

अकबर – ये कैसे तुम्हारी मदद करेगा, ये तुम्हे कैसे बताएगा कि चोर कौन है?

(बीरबल एक तम्बू में गधे को खड़ा कर देते हैं)

बीरबल – जहाँ पना इस तम्बू के अंदर एक-एक करके सिपाही और दासियो को भेजिए और इन सबको गधे की पूंछ पकड़ कर ये बोलना है कि मैंने चोरी नही की। जब ये सारे लोग गधे की पूंछ पकड़ लेंगे, तभी मेरा दोस्त बताएगा चोर कौन है।

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अकबर – ठीक है! सिपाही और दासियो आप सभी लोग एक-एक कर गधे की पूंछ पकड़िए।

और फिर सभी सिपाही और दासी गधे की पूंछ पकड़ते हैं –

बीरबल – अब मैं अपने दोस्त से पूछ कर आता हूँ कि चोर कौन है।

(कुछ देर बाद) जहाँ पना हमे इन सभी के हाथ सूंघने हैं। और तभी हाथ सूंघने के बाद, ये सिपाही चोर है।

सिपाही – नहीं, जहाँ पना मैंने कोई चोरी नही की, मैंने तो आपकी इतने वर्षों से सेवा की है। इस गधे की गवाही कुछ साबित नही करती है।

अकबर – बीरबल तुम कैसे कह सकते हो कि यही चोर है। तुम गधे की बात कैसे समझ सकते हो।

बीरबल – जहाँ पना मैंने उस गधे की पूंछ पर एक खास इत्र लगा दिया था। इसलिए मैंने इन सभी से गधे की पूंछ पकड़ने को कहा और जहाँ पना मैं ये भी जानता था कि चोर पकड़े जाने के डर से गधे की पूंछ नही पकड़ेगा। उस इत्र की खुशबू सभी के हाथों में से आ रही थी। लेकिन जब मैंने इसके हाथ सूंघे, तो इसके हाथों में वह खुसबू नही आ रही थी। इसलिए यही चोर है।

अकबर – नमक हराम हम तुम्हे इसकी सजा देंगे।

सिपाही – नही जहाँ पना मुझे माफ़ कर दीजिए। मैं लालची हो गया था। मुझे माफ़ कर दीजिये। मैं चोरी की हुई सारी चीजें लौटा दूंगा। बस मुझे माफ़ कर दीजिए।

अकबर – नही तुम्हें माफ नही किया जा सकता है, जिस थाली में खाते हो उसी मे छेद करते हो, सिपाहियों ले जाओ इसे काल कोठरी में डाल दो।

बीरबल एक बार फिर आपने अपनी चतुराई से उस चोर को पकड़वा दिया, शुक्रिया बीरबल! शुक्रिया!

बीरबल – शुक्रिया जहाँ पना!


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#07 मूर्ख लोगों की सूची

एक दिन शहंशाह अकबर दरबार मे अपने लोगों के साथ बैठे थे, तभी अचानक शहंशाह बोले

अकबर – हमारे दरबार मे कितने बुद्धिमान लोग हैं। मैं एक शहंशाह हूँ। इसलिए हमारे आस पास बुद्धिमान लोग ही रहते हैं। मैं बुद्धिमान लोगो के बीच रह कर ऊब चुका हूँ। इसलिए अब मैं कुछ मूर्ख लोगो से मिलना चाहता हूँ।

बीरबल वैसे तो हमने आपको जितनी भी आज तक चुनौतियों दी हैं, सभी चुनौतियो में आप खरे उतरे हैं। क्या आप हमारे लिए छ: मूर्ख लोग ढूंढ सकते हैं। कितना दिल चस्प रहेगा उन मूर्ख लोगो से मिलना।

बीरबल – जी जहाँ पना क्यूँ नहीं। मैं ज़रूर ढूंढ निकालूंगा।

अकबर – हम आपको एक महीने का वक्त देते हैं, छ: मूर्ख लोगो को ढूंढने का।

बीरबल – जहाँ पना मुझे नही लगता मुझे इतने वक्त की ज़रुरत पड़ेगी।

अकबर – ठीक है बीरबल, आपकी मर्जी आप उससे पहले ढूंढ सकें तो।

फिर क्या था बीरबल अपना घोड़ा लेकर मूर्ख लोगो की तलाश में निकल जाते हैं और रास्ते भर यही सोचते रहे कि मैं कहां ढूंढूंगा उन मूर्ख लोगों को। तभी अचानक एक गधे पर एक आदमी बैठा था और उसके सिर पर घांस बंधी रखी थी। बीरबल उसे देख कर अपना घोड़ा रोकते हैं और उससे उसकी पहचान पूछते हैं।

बीरबल – तुम कौन हो और ये घांस अपने सिर पर क्यूँ रखी है, इसे गधे के ऊपर क्यूँ नही रखा है।

रामू – मेरा नाम रामू है और मैंने ये घांस इसलिए अपने सिर पर रखी है क्यूंकि मेरा गधा बहुत थक गया था और मैंने सोचा उसका कुछ भार अपने ऊपर लेलूं।

बीरबल ने सोचा मुझे मेरा पहला मूर्ख मिल गया-

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बीरबल – अच्छा, अच्छा! हम आपको जानवरों के बारे में इतना सोचने के लिए इनाम दिलबायेंगे चलो तुम हमारे साथ चलो।

रामू – अच्छा मुझे इनाम मिलेगा तो चलो।

तभी बीरबल कुछ दूर और चलते हैं, चलते चलते उन्हें दो लोग लड़ते दिखाई देते हैं। वह फिर अपना घोड़ा रोकते हैं और पूछते हैं-

बीरबल – रुक जाओ, रुक जाओ, तुम लोग क्यूं लड़ रहे हो,
ऐसी क्या बात हो गयी और तुम कौन हो?

पहला आदमी – मेरा नाम चंगु है।

दूसरा आदमी – और मेरा नाम मंगू है।

मंगू – ये चंगु मेरी गाय पर अपना शेर छोड़ने को कह रहा है।

चंगु – हाँ मैं छोडूंगा, मुझे बहुत मज़ा आएगा, मैं इसलिए छोडूंगा।

बीरबल – क्या, (शेर-गाये)! चंगु कहां है तुम्हारा शेर और मंगू कहाँ है तुम्हारी गाये?

चंगु – हमें भगवान वरदान देंगे तो मै गाय मागूँगा और ये शेर मांगने की बात कर रहा है, और कह रहा है ये अपना शेर मेरी गाय पर छोड़ देगा।

बीरबल – अच्छा तो ये बात है, तो तुम दोनों मेरे साथ चलो मैं तुम्हे शहंशाह से इनाम दिलबाउंगा भगवान के बारे में इतना अच्छा सोचने के लिए।

चंगु-मंगू – इनाम, हम ज़रूर चलेंगे।

बीरबल उन तीनों को अपने घर ले जाते हैं, घर ले जाकर फिर बीरबल सोचते हैं, अब मैं वाकी के मूर्खो को कहाँ खोजूं। फिर बीरबल उसी वक्त अपने घर से बाहर चल देते हैं और उन तीनों मूर्खो को घर पर ही रहने को कह देते हैं।

जब वह (बीरबल) घर से बाहर निकलते हैं, तभी उन्हें एक आदमी क्यारियों में कुछ ढूंढता दिखाई देता है। बीरबल उनके पास जाते हैं और कहते है –

बीरबल – क्या आप कुछ ढूंढ रहे हैं, क्या मैं आपकी कोई मदद कर सकता हूँ।

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आदमी – वो मेरी अंगूठी गिर गई है, मैं बहुत देर से ढूंढ रहा हूँ, पर मिल नही रही है।

बीरबल – आपकी अंगूठी कहां पर गिरी थी?

आदमी – मेरी अंगूठी वो दूर उस पेड़ के नीचे गिरी थी, वहां पर अंधेरा हो गया है, इसलिए मैंने सोचा उसे मैं यहां पर ढूंढ लूँ।

बीरबल – ओ, अच्छा, अच्छा! तो आप हमारे साथ कल शहंशाह के पास चलिए हम आपको दूसरी अंगूठी दिलवा देंगे। आप उस अंगूठी को छोडिये।

आदमी – अच्छा जी, फिर तो ठीक है।

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फिर अगले दिन बीरबल उन चारों को शहंशाह अकबर के पास लेकर चलते हैं।

बीरबल – शहंशाह ये रहे आपके मूर्ख।

अकबर – आप एक दिन में ही ये काम कर पाए, क्या हमारी सल्तनत में बहुत सारे मूर्ख लोग हैं। और तुम्हे कैसे यकीन है ये चारो मूर्ख हैं।

बीरबल रास्ते मे घटी घटनाओं को अकबर को बताता है। अकबर को बीरबल की बातों पर बहुत हसीं आती है।

अकबर – लेकिन ये तो सिर्फ चार मूर्ख हैं, बाकी के दो कहाँ हैं।

बीरबल – जहाँ पना वो दो मूर्ख यहीं मौजूद हैं।

अकबर – यहाँ-कहाँ, हमे बताओ वो कौन हैं।

बीरबल – उसमे से एक तो मैं हूँ, जो सबसे बड़ा मूर्ख है।

अकबर – क्या आप, आप कैसे?

बीरबल – मैं इसलिए हूँ, क्योंकि मैं इन मूर्खों को ढूंढ कर लाया।

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अकबर -( हंस कर) हा-हा! मैं समझ गया दूसरा मूर्ख कौन है, फिर भी मैं चाहता हूँ आप बताये वो मूर्ख कौन है।

बीरबल – सबसे बड़े मूर्ख आप हैं, जो आपने मुझे इन मूर्खो को लाने के लिए कहा।

अकबर – बहुत खूब! बहुत खूब बीरबल! जैसा कि मैं हर बार कहता आया हूँ। आपका जबाब नही। बीरबल आपकी बराबरी कोई नही कर सकता है, आपके पास हर सबाल का हल है बहुत खूब।

बीरबल = शुक्रिया जहाँ पना!


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#08 चित्रकार की व्यथा

शहंशाह अकबर एक बहुत गुस्सेल शहंशाह थे। उन्हें बहुत जल्दी गुस्सा आ जाया करता था। कभी-कभी तो गुस्से में आकर छोटी सी गलती पर भी वे लोगों को बड़ी सज़ा दे दिया करते थे।

लेकिन राजा बीरबल ये बात अच्छी तरह जानते थे, कि शहंशाह के गुस्से पर काबू कैसे पाना है। एक वही ऐसे इंसान थे, जो जानते थे शहंशाह को शांत कैसे करते हैं।

एक दिन की बात है, जब शहंशाह अकबर अपने ख्वाबगाह (कमरे) में पहुंचे, तो चारों तरफ दीवारों का रंग देखा और गुस्से से एक सिपाही को बुलाया।

अकबर – सिपाही, सिपाही….

सिपाही – जी…जहां पना!

अकबर – ये दीवारों के लिए इतने घटीया रंग को किसने चुना है?

सिपाही – वो……जहाँ पना!

अकबर – वो-वो, क्या कर रहे हो?

सिपाही – वो, आपने जहाँ पना।

अकबर – क्या, तुम्हारी इतनी हिम्मत, तुम हमसे इस तरह बात करो, जाओ उस रंगरेज़ को बुला कर लाओ, जिसने ये दीवारे रंगी हैं।

सिपाही – जी! जहां पना।

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फिर थोड़ी ही देर में वह सिपाही उस रंगरेज़ को अकबर के ख्वाबगाह में लेकर आता है – 

रंगरेज़ – आदाब! जहाँ पना।

अकबर – ओह! तो वो तुम हो जिसने ये दीवारे रंगी हैं।

रंगरेज़ – जहां पना क्या मुझसे कोई गलती हो गई है, मैं उसे अभी सुधार दूंगा।

अकबर – तुमसे गलती नही, बिल्कुल नहीं, हम तो पागल हो गए हैं। तुम हमारी ख्वाबगाह का रंग इतनी जल्दी कैसे बदल सकते हो।

रंगरेज़ – जहाँ पना आप चिंता मत करिए, मैं सारी रात काम करके आपकी ख्वाबगाह का रंग बदल दूँगा।

अकबर – ठीक है! लेकिन दोबारा गलती हुई, तो मैं तुम्हे रंग पीने को कह दूंगा, जाओ अपने रंग को लेकर आओ, हम चुनेंगे दीवारों का रंग। लेकिन ध्यान रहे अब कोई गलती न हो।

थोड़ी देर में वह रंगरेज़ अपने रंग लेकर आता है। उन रंगों में से एक रंग शहंशाह चुनते हैं। रंगरेज़ पूरी रात काम करके उन दीवारों का रंग बदलता है। लेकिन फिर भी शहंशाह को उन दीवारों का रंग पसन्द नही आता है, वह फिर से एक सिपाही को बुलाते हैं –

अकबर – सिपाही, जल्दी भागो और उस रंगरेज़ को बुलाकर लाओ।

सिपाही बिना कुछ कह जल्दी से भागता हुआ रंगरेज़ को बुलाने जाता है

रंगरेज़ – अ…..आदाब जहाँ पना।

अकबर – हमारे मना करने के बाद भी इतना घटिया रंग इन दीवारों पर किया है, जाओ अपने रंग लेकर आओ।

रंगरेज़ गहरी सोच में डूबा हुआ, अपने रंग लेने जा ही रहा था, तभी वहीं रास्तें में उस रंगरेज़ की बीरबल से टक्कर हो जाती है।

रंगरेज – माफ करें, राजा बीरबल।

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बीरबल – कोई बात नही, लेकिन तुम इतने परेशान क्यूं हो?

रंगरेज़ सारा वाक्या बीरबल को सुनाता है। बीरबल कहते हैं, अगर तुमसे शहंशाह ने रंग पीने को कहा है, तो वो तुम्हे रंग ज़रूर पिलायेंगे। ये बात कह कर बीरबल रंगरेज़ के कान में कुछ कहते हैं और रंग लाने को कहते हैं। तभी रंगरेज़ अपने सारे रंग लेकर अकबर के पास जाता है।

रंगरेज़ – लीजिये जहाँ पना सारे रंग।

अकबर – अब तुम्हारी सज़ा ये है तुम ये रंग पीओ और कल तुम्हे इस ख्वाबगाह का रंग बदलना है।

रंगरेज़ – ले….लेकिन जहाँ पना, ठीक है!

(और रंगरेज़ उन घड़ों में से एक घड़े का रंग पी लेता है)

अकबर – ठीक है! अब तुम जाओ कल आना।

अकबर ने सोचा आज मैंने उस रंगरेज़ को रंग पिलाया है, उसकी ज़रूर तबियत खराब हो जाएगी, वह कल काम पर भी नही आएगा। फिर अगले दिन वह रंगरेज़ शहंशाह के ख्वाबगाह की दीवारें रंग रहा होता है, तभी उस रंगरेज़ पर शहंशाह की नज़र पड़ती है। शहंशाह हैरान रह जाते हैं और सोचते हैं – मैंने तो इसे कल रंग पिलाया था, पर यह आज काम पर कैसे आ सकता है। उसी वक्त शहंशाह उसके पास जाते हैं –

अकबर – अभी तक तुमने दीवारों तक का रंग नही उतारा है, बाकी काम कब होगा, हम तुम्हे इसकी सज़ा देंगे जाओ अपने रंग लेकर आओ।

रंगरेज़ घबरा जाता है और बीरबल से मिलने जाता है। बीरबल फिर कोई तरकीब उस रंगरेज़ को बताते हैं और कहते हैं – तुम घबराओ मत सब ठीक हो जाएगा। रंगरेज़ अपने रंग लेकर शहंशाह के पास जाता है –

रंगरेज़ – लीजिये जहाँ पना मैं रँग ले आया हूँ।

अकबर – हूँ🤔, आज तुम्हे इन घड़ों में से दो का रंग पीना है।

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रंगरेज़ पहला घड़ा उठाता है और पीने लगता है। शहंशाह उसे रंग पीता देख बहुत हैरान हो जाते हैं और कहते हैं –

ठहरो! रंगरेज़ को रोक कर शहंशाह दूसरे घड़े का रंग चखते हैं और कहते हैं –

अकबर – क्या, ये तो शर्बत है! तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई हमसे धोखा करने की। तुम्हारी ये ज़ुर्रत, बताओ ये तरकीब तुम्हे किसने बताई बताओ?

तभी उसी समय बीरबल वहाँ आते हैं और कहते हैं-

बीरबल – जहाँ पना ये तरकीब हमने इसे बताई। गुस्ताखी माफ। आपको शांत करने की कोई और तरकीब नही थी। इसलिए मैंने ऐसा किया।

अकबर ज़ोर से हँसते हैं और कहते हैं –

अकबर – हमे पहले ही समझ जाना चाहियें था, इस सब के पीछे कोई और हो ही नही सकता। बीरबल तुम्हे हमारे गुस्से पर काबू पाना बखूबी आता है, लेकिन हमें ये बात समझ नही आ रही कि तुम्हे पता कैसे चला कि आज मैं इसे कौन सा रँग पिलाने वाला हूँ।

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बीरबल – जहाँ पना मुझे ये नही पता था कि आप आज इस रंगरेज़ को कौन-सा रँग पिलायेंगे, इसलिए मैंने रंगरेज़ से रसोई में से सभी रंगों के शर्बत बनाने को कहा।

अकबर – वाह बीरबल! बहुत खूब! आज आपने हमारे गुस्से से एक जान बचाली, पता नही हम गुस्से में क्या कर बैठते, जैसा मैं हर बार कहता आया हूँ, आपके जैसा कोई नही।

अकबर रंगरेज़ से कहते हैं – तुम्हे सजा तो मिलेगी, तुम हमारी ख्वाबगाह की दीवारों को रंगों और आज शाम की दावत में तुम भी शामिल होगे।

रंगरेज़ – जी! जहाँ पना, शुक्रिया जहाँ पना।


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#09 देवता का बन्द मंदिर

एक दिन शहंशाह अपने दरबार मे बैठे लोगों से धर्म के मसले पर बात कर रहे थे –

दरबारी – जहाँ पना, हमे लगता है कि हमे पीर, पैगम्बरों, साधु, संतों की सेवा करनी चाहिये, क्योंकि उन्ही के ज़रिए हमारी सारी मुरादें पूरी होती हैं। एक वही ऐसे लोग होते हैं जो हमारे हक में दुआ करते हैं। तभी हमारी मुरादें पूरी होती हैं।

अकबर – हाँ, क्यूँ नही! हम तो उन सभी का बहुत अच्छे से ख्याल रखते हैं। हम बहुत बड़ी तादात में दान पुण्य, अनाज, कपड़े आदि दान करते हैं और साधु संतों को खाना खिलाते हैं। क्योंकि हम जानते हैं, इनके जरिये ही हमारी मुरादे पूरी होती हैं। लेकिन बीरबल आप फिर चुप बैठे हैं।

हमें लगता है आप हमारी बात से सहमत नहीं हैं। क्या आप नही मानते कि साधू संत के ज़रिए हमारी मुरादे पूरी होती हैं।

बीरबल – जी! जहाँ पना मुझे ऐसा बिल्कुल नहीं लगता, कि हमारी मुराद किसी साधू, सन्तो द्वारा पूरी होती हैं।

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अकबर – क्या, तुम कहना क्या चाहते हो, लाखो लोगो की मुरादें इन जगहों पर ही पूरी होती हैं और तुम्हे नही लगता इनके जरिए हमारी मुरादें पूरी होती हैं।

बीरबल – जहाँ पना मेरा मानना है, किसी मंदिरों और साधू सन्यासियों और सन्तो पर लोगो का विश्वास ही होता है, जो लोगो की मुरादें पूरी होतीं हैं। विश्वास ही असली वजह है, जिसकी वजह से लोगों की मुरादें पूरी होती हैं और कुछ नही।

अकबर – क्या तुम्हें ऐसा लगता है, सिर्फ विश्वास की वजह से मुरादें पूरी होती हैं, तो फिर तुम साबित करके दिखाओ।

दरबारी – जहाँ पना हद है, अपने आपको सबसे अलग साबित करने के लिए बीरबल कुछ भी बोलते हैं।

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बीरबल – जहाँ पना मेरा मकसद किसी भी मंदिर या साधु संत का अपमान करने का नही था, मैं तो सिर्फ यही बताने की कोशिश कर रहा हूँ कि इंसान का विश्वास ही होता है जिससे मुरादें पूरी होती हैं।

अकबर – तुम ये कैसे कह सकते हो, अगर ऐसा है तो हमे साबित करके दिखाओ, अगर तुम ये साबित नही कर पाए तो अभी इसी वक्त इस अपमान के लिए तुम्हे माफी मांगनी होगी।

बीरबल – जहाँ पना मेरा मकसद आपके दिल को ठेस पहुचाना नही है, मैं आपको साबित करके दिखाऊंगा। विश्वास ही सब कुछ है जहां पना इसके लिए मुझे दो महीने का वक्त चाहिये।

अकबर – क्या दो महीने! ठीक है, तुम्हे दो महीने का वक्त दिया, लेकिन इस बार तुम कुछ भी साबित नही कर पाओगे। चाहें दो महीने का वक्त ले लो या दो सौ साल का। इस बार तुम्हारी हार पक्की है, लेकिन अगर तुम ये बात साबित नही कर पाए, तो हम तुम्हे सल्तनत से निकाल देंगे।

बीरबल – ठीक है जहाँ पना।

बीरबल ये कह कर दरबार से बाहर चले जाते हैं और सोचने लगते हैं, किस तरह अपनी बात को साबित किया जाए। कुछ देर सोचने के बाद वह अपने नौकर सेवक राम को बुलाते हैं –

बीरबल – सेवकराम यहां आओ।

सेवक राम – जी जनाव कहिए क्या काम है।

बीरबल – हमारी यमुना नदी के किनारे जो ज़मीन है, उस पर हमें मंदिर बनबाना है, मंदिर एक महीने में तैयार होना चाहिए। तुम मज़दूरों का इंतज़ाम करो, लेकिन ध्यान रहे मंदिर बहुत ज़्यादा बड़ा नही होना चाहिये, मंदिर बहुत खूबसूरत और शानदार होना चाहिये।

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सेवकराम – जनाब मंदिर एक महीने में तैयार करना है तो बहुत सारे मज़दूर लगेंगे।

बीरबल – चाहें कितने भी मज़दूर लगें लगाओ, लेकिन मंदिर एक महीने में तैयार हो जाना चाहिये।

और फिर एक महीने में छोटा सा और बहुत शानदार मंदिर बन कर तैयार हो जाता है।

बीरबल – बहुत बढ़िया सेवक राम बहुत खूब सूरत है। अब सेवकराम इस मंदिर के बारे में सभी जगहों पर अच्छी अच्छी बातें फैला दो। लोगो से इस मंदिर के चमत्कारों के बारे में कहो। लोगों को बताओ इस मंदिर में सभी की मुरादें पूरी होती हैं और इस मंदिर को बंद मूर्ति का मंदिर नाम दो।

सेवक राम – बन्द मूर्ति वाला मंदिर! ये मंदिर अपने नाम से ही अदभुत होगा। बहुत अच्छा सोचा है आपने, मैं कुछ काना फूसी करने वाले लोगो को जानता हूँ, वह आग की तरह ये खबर लोगो मे फैला देंगे।

बीरबल -ये काम जल्दी शुरू करो सेवकराम।

सेवकराम – जी जनाब!

ये खबर लोगो मे आग की तरह फैल गई और दूर-दूर से लोग इस मंदिर के दर्शन के लिए आने लगे। और ये बात शहंशाह अकबर तक पहुँच गई। एक दिन शहंशाह अपने दरबार मे बैठे हुए थे, तभी वहाँ बैठे दरबारी बोले –

दरबारी – जहाँ पना आपने बन्द मूर्ति वाले मंदिर के बारे में सुना है। जहाँ पना उस मंदिर में बड़े-बड़े चमत्कार होते हैं और बहुत से लोगों की मुरादें पूरी होती हैं।

अकबर – हाँ, हमने उस मंदिर के बारे में सुना है, बीरबल तुम क्या कहते हो उस मंदिर के बारे में।

बीरबल – जी, जहां पना मैं जानता हूँ, वो बहुत चमत्कारी मंदिर है, वहाँ बहुत से लोगो की मुरादें पूरी होती हैं।

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अकबर – क्या आप बीरबल हमारे साथ उस मंदिर में जाना पसंद करंगे और हां बीरबल अभी तक आपने अपनी बात साबित नही की है।

बीरबल – मेरी खुशकिस्मती होगी आपके साथ उस मंदिर में जाने की और रही बात मेरी बात साबित करने की आप चलिए तो सही मंदिर।

अकबर – हम मंदिर में जाकर पश्चिम में चल रही जंग की फतह की दुआ मांगेंगे, हम वह जंग जीत जाएं।

तभी बीरबल और शहंशाह, मंदिर के दर्शन के लिए चल देते हैं। मंदिर में पहुंच कर अकबर दुआ मांगते हैं।

अकबर – हम आज इस मंदिर में दुआ मांगते हैं, कि हम पश्चिम में चल रही जंग जीत जाएं।

तभी वहाँ एक सिपाही भागा भागा आता है –

सिपाही – जहाँ पना, जहाँ पना, आपके लिए खुश खबरी लाया हूँ, हम पश्चिम में चल रही जंग जीत गए। वहाँ के राजा ने हथियार डाल दिये हैं।

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अकबर – देखा बीरबल, हम सही साबित हुए, हमने आपसे कहा था, इन जगहों पर ही दुआयें कुबूल होती हैं। अब आप क्या कहते हैं।

बीरबल – बीरबल मैं अब भी इस बात को नही मानता, मैं विश्वास को ही सबसे बड़ी शक्ति मानता हूँ।

अकबर – क्या तुम होश में तो हो, इतना बड़ा सबूत देख कर भी तुम्हे यकीन नहीं हो रहा है।

बीरबल – जहाँ पना! जरा आप इस मंदिर का दरवाजा खोल कर उस मूर्ति को तो बाहर लाइये, आप सब समझ जाएंगे।

अकबर उस मंदिर का दरवाजा खोलते हैं और वहाँ एक कपड़े में रखी वस्तु उठा कर बाहर लाते हैं।

बीरबल – जहाँ पना इस कपड़े को ज़रा हटाइये तो।

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अकबर उस कपड़े को हटाते हैं और कहते हैं –

अकबर – ये क्या मज़ाक है, ये तो हमारा पसंदीदा फूलदान है, जो हमे एक चीनी यात्री ने दिया था। ये यहाँ कैसे आया। ये कई दिनों से हमारे कमरे से गायब है। ये यहाँ क्या कर रहा है। इससे क्या साबित होता है, हम आपकी शक्ल भी नही देखना चाहते।

बीरबल – जहाँ पना मैं आपको सब समझाता हूँ, दरसल ये मंदिर मैंने बनबाया है और ये फूलदान मैं ही आपके कमरे से लाया हूँ। (बीरबल अकबर को बताते हैं उन्होंने मंदिर कैसे और क्यूँ बनबाया पूरा वाक्य बताते हैं।)

अब तो आप जहाँ पना समझ गए होंगे, विश्वास से ही सारी मुरादे पूरी होती हैं, एक विश्वास ही है जो सबसे बड़ी शक्ति है।

अकबर – हाँ बीरबल हम समझ गए, बहुत खूब बीरबल, वाकई विश्वास से बड़ी कोई शक्ति नही होती है, न कोई मंदिर, न ही कोई साधु संत, लेकिन अब इस मंदिर का क्या करेंगे।

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बीरबल – जहां पना क्यों न इस मंदिर को बाहर से आने बाले मुसाफिरों के ठहरने के लिए सराय या धर्मशाला बना दिया जाए।

अकबर – बहुत खूब बीरबल! बहुत खूब! हम ऐसा ही करेंगे। बीरबल वाकई तुम्हारा जबाब नही, बहुत अच्छा काम किया बहुत बढ़िया।

बीरबल = शुक्रिया जहाँ पना!


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#10 बैल का दूध

एक दिन शहंशाह अकबर अपने दरबार मे बैठे बीरबल की तारीफ कर रह थे।

अकबर – हमे इस बात की खुशी है कि हमारे राज्य में बीरबल जैसे होनहार और बुद्धिमान मंत्री हैं। हमने बीरबल को आज तक जो भी चुनोती दी हैं, बीरबल उन सभी में आज तक खरे उतरे हैं। उनकी बराबरी कोई नही कर सकता है। वह सबसे बुद्धिमान हैं।

दरबार में बैठे सभी लोग शहंशाह अकबर की बात से सहमत होतें है, लेकिन सुखदेव सिंह चुप बैठे रहते हैं –

अकबर – सुखदेव सिंह जी, दरबार में बैठे सभी लोग बीरबल की तारीफ कर रहे हैं, लेकिन हमने देखा आप चुप बैठे हैं। क्या आप हमारी बातों से सहमत नहीं है।

सुखदेव – जी, जहाँ पना! वे बुद्धिमान होंगे, लेकिन मुझे नही लगता वह सबसे बुद्धिमान हैं।

अकबर – क्या, ये आप क्या कह रहे हैं, हम सभी लोग मानते हैं कि बीरबल जैसा कोई नही। बीरबल ने आज तक सभी चुनौतिया पूरी की हैं। आप चाहें तो आप भी बीरबल को कोई भी चुनोती दे सकते हैं और मुझे पूरा विश्वास है वह खरे उतरेंगे।

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सुखदेव – ठीक है जहां पना! मैं बीरबल को एक चुनोती देता हूँ, बीरबल को हमारे लिये बैल का दूध लाना पड़ेगा।

अकबर – क्या तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है, कोई भला बैल का दूध कहां से लाएगा।

सुखदेव – जहाँ पना बैल का दूध लाना कौन-सी बड़ी बात है। क्या बीरबल हमारी इतनी सी भी चुनौती मान नही सकते।

अकबर – बीरबल आपका क्या कहना है, आप बैल का दूध ला सकते हैं।

बीरबल – जी, जहाँ पना! अगर आप चाहते हैं, तो मैं ज़रूर इस चुनौती को मानूँगा।

अकबर – क्या आप सच मे बैल का दूध लाएंगे।

बीरबल – हाँ! अगर आप चाहते हैं, तो मैं ऐसा ज़रूर करूंगा।

अकबर – ठीक है! बीरबल हमे आपकी इस चुनौती को पूरा करने का बेसब्री से इंतेज़ार रहेगा। हमे आप ये बताइए आपको कितना वक्त चाहिये इसे पूरा करने के लिए।

बीरबल – जहाँ पना मुझे सिर्फ एक दिन का वक्त चाहिये।

अकबर – क्या सिर्फ एक दिन🙄! सिर्फ एक दिन में आप ये कैसे करलोगे।

बीरबल – जहाँ पना एक दिन काफी है।

अकबर – ठीक है! बीरबल।

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तभी उसी रात शहंशाह अकबर अपने कमरे में सो रहे थे। तभी ज़ोर-ज़ोर से कुछ आवाज़ें आने लगीं। शहंशाह की नींद टूट गई और वह गुस्से से उठे और एक सिपाही को आवाज़ लगाई।

अकबर – सिपाही, सिपाही (सिपाही भाग कर आता है) ये कैसा शोर हो रहा है। इतने शोर में हम कैसे सो पाएंगे जाइये ये आवाज़ बन्द करवाइए।

सिपाही – जी, जहाँ पना।

फिर थोड़ी देर बाद वैसी ही शोर भरी आवाज़ें आना शुरू हो जाती हैं, शहंशाह अकबर फिर से गुस्से में उठते हैं –

अकबर – सिपाही, सिपाही, क्या हमने आपसे ये शोर बन्द करबाने को नही कहा था, अब आप जाइये और उस गुस्ताख़ को बुलाकर लाईए जिसने हमारी नींद खराब की।

सिपाही – जी…जहाँ पना।

सिपाही वहाँ जाते हैं, जहां पर शोर हो रहा था, वहाँ कुएं के पास एक छोटी सी लड़की कपड़े धो रही थी।

सिपाही – ऐ लड़की! हमने तुझसे मना किया था, यहां पर शोर मत कर, लेकिन अब तूने शहंशाह को गुस्सा दिला दिया, अब वह तुझे सजा देंगे।

लड़की – क्या😨… स..सज़ा।

और उस लड़की को सिपाही शहंशाह के पास ले जाते हैं –

सिपाही – जहाँ पना मुज़रिम को ले आये हैं। लेकिन जहाँ पना वह एक छोटी बच्ची है।

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अकबर – चाहें वो एक छोटी बच्ची हो, या कोई बच्चा हो, या बड़ा लड़का हो, या लड़की, अगर उसने हमारी नींद खराब करने की सही वजह नही बताई, तो हम उसे सजा देगें, जाओ उसे लेकर आओ।

अकबर इतनी छोटी बच्ची को देखकर हैरान होते हैं –

अकबर – ऐ! लड़की तुम इतनी रात गए यहाँ पर क्या कर रही हो। अपने घर जाकर सो क्यूँ नही जातीं, तुम ने मेरी नींद क्यूँ खराब की।

लड़की – (घबरा कर) वो मैं कपड़े धो रही थी।

अकबर – इतनी रात में कपड़े धो रही थी लेकिन क्यूँ?

लड़की – वो… मेरी माँ अपने मायके यानी अपने गांव गयी हुई हैं और मेरे पिताजी के बच्चा हुआ है।

अकबर – क्या तुम्हारी माँ गाँव गई हैं और तुम्हारे पिताजी के क्या हुआ है?

लड़की – मैं वही तो बोली, मेरे पिताजी के बच्चा हुआ है।

अकबर – क्या तुम्हारे पिताजी के बच्चा हुआ है, क्या तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है, किसी भी आदमी के बच्चा कैसे हो सकता है? क्या कभी सुना है, किसी आदमी के बच्चा हुआ है।

लड़की – जहाँ पना! मैंने तो सुना है, आपके राज्य में बैल दूध देता है, तो आदमी के बच्चा क्यूँ नही हो सकता है।

अकबर – ओह! अच्छा हम समझ गए ये सब बीरबल की शरारत है। (और अकबर बहुत हस्ते हैं)

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सिपाहियों इस लड़की को हिफाज़त से इसके घर तक छोड़ कर आओ और इस लड़की को सज़ा के तौर पर रसोई घर से ढेर सारी मिठाइयां दो। और तुम लड़की बीरबल से कहना हम अच्छी तरह समझ गए, हमे कल दरबार मे मिले।

लड़की बहुत खुश होकर अपने घर चली जाती है।और फिर अगले दिन दरबार मे –

सुखदेव – जहाँ पना मैं माफी चाहता हूँ, आज मैं बहुत देर से उठा, दरसल कोई पागल इंसान इतनी ज़ोर-ज़ोर से शोर कर रहा था, जिसकी वजह से मैं सो नही पाया।

अकबर सुखदेव की ये बात सुनकर ज़ोर-ज़ोर से हँसते हैं-

सुखदेव – जहाँ पना मैं मज़ाक नही कर रहा हूँ।

अकबर और ज़ोर से हँसते हैं –

अकबर – हाँ-हाँ! हमे पता है, हम आपको समझाते हैं। अकबर सुखदेव को रात की घटी घटना का वाक्या सुनाते हैं। क्यूँ सुखदेव अब तो मानते हो बीरबल के पास हर चुनोती का तोड़ है।

बीरबल – माफ कीजियेगा जहाँ पना देर से आने के लिए।

अकबर – अरे! आओ बीरबल, बहुखूब! बहुत बढ़िया तरीका था, हमे समझाने का। बहुत खूब!

सुखदेव – हाँ! हम भी आपको मान गए, आपका कोई तोड़ नही। आपको कोई नही हरा सकता, आप बहुत बुद्धिमान हैं।

बीरबल – शुक्रिया सुखदेव!

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