Love Shayari

Love Shayari

रूठ जाओ कितना भी मना लेंगे,
दूर जाओ कितना भी बुला लेंगे,
दिल आखिर दिल है मेरा
कोई समंदर की रेत तो नही,
जो लिख कर नाम मिटा देंगे।


क्यों तुझको देखना चाहती हैं ये मेरी आँखे,
क्यों खामोश करती है बस तेरी बातें,
क्यों तुझे मैं इतना चाहने लगी हूँ मैं,
की तारे गिन गिन के कटती हैं अब मेरी राते।


अगर भूले से हमारी याद आती हो,
और तन बदन में एक
शहरन सी दौड़ जाती हो,
तो मेरे सनम मेरे पास चले आना,
अगर सुनी सुनी राते
तुम्हे बहुत सताती हों।


जो कुछ भी मिला है
जिंदगी में मैं उसी में खुश हूँ,
तेरे लिए खुदा से तकरार नही करती हूँ,
लेकिन कुछ तो बात है
तेरी फितरत में ऐ ज़ालिम,
वरना तुझे चाहने की
खता बार बार क्यों करती हूँ।


परवाह कर उसकी जो तेरी परवाह करे,
जिंदगी में कभी न तन्हा करे,
रूह बन कर उतर जाना उसकी रूह में,
जो जान से भी ज्यादा तुझसे वफ़ा करे।


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